आगरा, जागरण संवाददाता। कोई भी जंग जीतने के लिए तीन चीजें चाहिए-अनुभव, हथियार और जोश। कोरोना के खिलाफ जंग में भी यही तीन चीजें काम आईं। प्रधानमंत्री के मन की बात सुनने और अपने मन की बात सुनाने वाले शहर के जूता कारोबारी अशोक कपूर के परिवार ने कोरोना की जंग इन्हीं तीनों चीजों के भरोसे जीती। इस परिवार के छह सदस्य व इनका अकाउंटेंट प्रदेश में सबसे पहले कोरोना पाजिटिव घोषित किए गए मरीज थे। अब सभी पूरी तरह स्वस्थ हैं। प्रधानमंत्री द्वारा कुशलक्षेम पूछने के बाद अब यह परिवार दूसरों के लिए रोल मॉडल बन गया है।

कपूर परिवार में अनुभव मुखिया अशोक कपूर का था। हथियार सजगता और चिकित्सकों की सहायता बना और जोश भर रहा था दसवीं का छात्र और परिवार का सबसे छोटा सदस्य तनिश। जागरण से बातचीत में अशोक कपूर ने बताया कि दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में जब वह भर्ती थे तो आपस में हिम्मत देने और बढ़ाने का एक मात्र सहारा मोबाइल और वीडियो कालिंग ही थी। सबको तनिश की चिंता थी पर तनिश रोज खुद पूछता- दादू कैसे हैं। उसका इतना पूछना ही हम सब में जोश भर देता। पिता सुमित कपूर भी तनिश का हालचाल लेते तो वह अपनी कुशलता बताने से पहले उन्हें ही जोश से भर देता। बकौल अशोक कपूर- फोन पर बच्चे समझाते थे। अब सब ठीक है, कोई परेशानी नहीं है। तनिश पल भर को भी परेशान नहीं हुआ।

परिवार की जुबानी 

हौसला बढ़ाते रहे डॉक्टर

नमूना पॉजिटिव आने के बाद दो मार्च को जिला अस्पताल से दो एंबुलेंस मिलीं, एक एंबुलेंस में दोनो बेटे और एक एंबुलेंस में मैं, मेरी पत्नी, बेटे की बहू और पोता था। हम अनिश्चितता में थे लेकिन दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पहले से पूरी तैयारी थी। पहुंचते ही गेट पर सफेद किट (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट) पहने स्टाफ खड़ा था। उन्होंने पांचवीं मंजिल पर हम सभी को अलग-अलग आइसोलेशन रूम में भर्ती कर दिया। बीमारी का पता नहीं था, पर यह था कि पूरा परिवार ठीक हो जाए और यहां से जल्द घर जाएं। अस्पताल में किसी के रूम में नहीं जा सकते थे। फोन पर एक-दूसरे से पूछ लेते थे, क्या हाल हैं?

दिल्ली में रहने वाले रिश्तेदार सुबह-शाम निर्धारित समय पर अस्पताल आते, हम लोग भी खिड़की पर आ जाते, सभी नीचे से हाथ हिला हमारा जोश बढ़ाते। डाक्टर सुबह शाम तीन बार पल्स, ब्लड प्रेशर और बुखार जांचते थे। (अशोक कपूर, उम्र 73 साल, दोनों घुटनों का प्रत्यारोपण हो चुका है)

बच्चे फोन पर समझाते रहे

रात को नींद नहीं आती थी। मन को समझाने की कोशिश की पर बार-बार नकारात्मक विचार आते। घबराहट होने लग जाती थी, लेकिन जब फोन पर बच्चे समझाते तो राहत मिलती। अब सब ठीक है।

(सुनीता, अशोक कपूर की पत्नी)

लेकिन बेटा नहीं घबराया

दिमाग में चल रहा था कि यह क्या हो गया। मगर, डॉक्टरों ने कहा तुम सभी स्वस्थ हो इसलिए कोई परेशानी नहीं होगी। डॉक्टर के ये शब्द हम सभी का हौसला बढ़ाता थ। हमारे पूरे परिवार में तनिश सबसे मजबूत था। हम सभी घबरा गए लेकिन बेटा नहीं घबराया।

(सुमित कपूर- 44 साल)

घर आने के बाद भी शारीरिक दूरी

आइसोलेशन रूम से बाहर नहीं निकल सकते थे। खुद अपने कपड़े धोए। घर आने के बाद हम सभी शारीरिक दूरी बना रहे हैं। हमने लोगों को जागरूक करने के लिए वीडियो भी जारी किए हैं।

अमित कपूर - (38 साल)

सावधानी बरतने से बच सकते हैं

दिल्ली में अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद पति और बेटे की चिंता सताती रही, क्योंकि ये दोनों हम लोगों के पांच दिन बाद घर आये। अब पूरा परिवार एक साथ है और खुश है। कोरोना को लेकर भ्रम अधिक है, सावधानी बरतने से बच सकते हैं।

सारिका कपूर (37 साल)

कोरोना से डर नहीं लगा

10 वीं की बोर्ड परीक्षा का दूसरा पेपर था, सुबह तैयार हो रहा था। तभी बताया गया कि पेपर देने नहीं जाना है। थोड़ी निराशा हुई, क्योंकि तैयारी बहुत अच्छी थी। आइसोलेशन के दौरान कभी भी डर नहीं लगा।

(तनिश कपूर, 16 साल) 

Posted By: Tanu Gupta

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