आगरा, जागरण संवाददाता। दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताज के शहर में प्रदूषण के बढ़े स्तर को लेकर हाय-तौबा मची है। धूल कणों की मात्रा बढऩे से सांसों में जहर घुल रहा है। प्रदूषण पर नियंत्रण को विगत एक जून को मुख्य सचिव ने एयर एक्शन प्लान लांच किया। प्लान लांच हुए 165 दिन बीत चुके पर यह प्लान फाइलों में ही सिमट कर रह गया। जिला विकास समन्वय और अनुश्रवण समिति (दिशा) की बैठक में सार्वजनिक सेवा से जुड़े इस मुददे पर चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन माननीयों को फुर्सत नहीं है।

शुक्रवार को सांसद एसपी सिंह बघेल की अध्यक्षता में हुई दिशा की बैठक में निर्माण से जुड़े कई मामलों पर चर्चा हुई पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोई नहीं बोला। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने देश के 102 शहरों के लिए एयर एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए थे। ये वो शहर थे जिनमें पिछले पांच वर्षों से एक्यूआइ का वार्षिक औसत 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक चल रहा है। उप्र के ऐसे 15 शहरों में आगरा भी शामिल है। उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी), यूनाइटेड नेशंस इन्वायरमेंट प्रोग्राम (यूएनईपी) और क्लीन एयर एशिया ने आगरा का एयर एक्शन प्लान तैयार किया। इसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा स्वीकृति दी गई।

तत्कालीन मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय ने एक जून को आगरा के एयर एक्शन प्लान को लांच किया था। मुख्य सचिव ने आगरा के एयर एक्शन प्लान को प्रदेश के लिए मॉडल बनाने की बात कही थी लेकिन प्लान के मुताबिक कुछ नहीं हुआ है। उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भुवन यादव ने बताया कि क्लीन एयर एशिया द्वारा प्लान पर वर्कआउट किया जा रहा है। कई मामलों में कार्यवाही भी हुई हैं।

आठ ईंट भट्ठों के खिलाफ कार्रवाई

आगरा में इस अवधि में केवल बाह तहसील के आठ ईंट भट्ठों के खिलाफ यूपीपीसीबी के लखनऊ मुख्यालय के निर्देशों पर बंदी की कार्रवाई की है।

ये उठाए जाने थे कदम

- वाहनों से होने वाले प्रदूषण की रोक के लिए प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ नियमित कार्रवाई।

- वायु प्रदूषण नियंत्रण, वाहनों की देखरेख, व्यक्तिगत वाहनों का कम से कम प्रयोग के लिए जागरूकता कार्यक्रम।

- पार्किंग के अलावा अन्य जगहों पर वाहनों की पार्किंग को रोकना।

ईंधन में मिलावट की जांच को एक्शन प्लान बनाना।

- निर्माण व विध्वंस से होने वाले प्रदूषण की रोक को निर्माण व विध्वंस नियम, 2016 का पालन कराना।

- सभी निर्माण क्षेत्रों को कवर कराना, जिससे कि धूल कण नहीं उड़ें।

- एयर क्वालिटी मैनेजमेंट डिवीजन की स्थापना।

- हेल्पलाइन बनाना।

- डीजल जेनरेटर सेट की निगरानी व उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई।

- सड़कों पर कूड़ा फेंकने पर रोक लगाना और कूड़े का पृथकीकरण करना।

- वायु प्रदूषण पर नियंत्रण व जनता के बचाव को एडवाइजरी जारी करना। 

Posted By: Prateek Gupta

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप