आगरा, जागरण संवाददाता। दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल को प्रदूषण से सुरक्षित रखने को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 30 दिसंबर 1996 को ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) असतित्व में आया। यहां प्रदूषणकारी उद्योगों पर ताला लग गया। इसके बावजूद यहां न तो हवा की गुणवत्ता सुधर रही है और न कभी शहर की जीवनदायिनी रही यमुना की दशा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर बना एयर एक्शन प्लान कागजों तक सीमित है। वहीं यमुना में आज भी नाले सीधे गिर रहे हैं। नालों के दूषित पानी के शोधन को बने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी सफेद हाथी बने हुए हैं। सोमवार को राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस है, लेकिन ये आगरा में बेमानी है। आखिर, यहां प्रदूषण नियंत्रण को किये गए उपाय जो फेल हो रहे हैं।

एसटीपी फेल, यमुना का बुरा हाल

यमुना नदी नहीं, नाला है। उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की वार्षिक रिपोर्ट, 2018 ने इस बात पर मोहर लगा दी थी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट ने सुधार को किए जा रहे प्रयासों पर भी सवालिया निशान उठा दिया है। रिपोर्ट में यमुना में गिरते नालों के जल के शोधन को बनाए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की कलई खुलकर सामने आई है। कोई भी एसटीपी मानकों पर खरा नहींं उतरा।

ताजनगरी में यमुना में 92 नाले गिरते हैं। इनमें से 31 को नगर निगम टैप कर चुका है, जबकि 61 को टैप करने के प्रस्ताव अमृत योजना में बनाए जा रहे हैं। इन 61 नालों से बिना शोधन के 400 एमएलडी पानी सीधे यमुना में गिर रहा है, लेकिन टैप किए गए नाले भी यमुना में जमकर जहर घोल रहे हैं। सीपीसीबी द्वारा मार्च, 2019 में बूढ़ी का नगला, जगनपुर, धांधूपुरा और देवरी रोड एसटीपी का निरीक्षण कर इनलेट व आउटलेट पर सैंपल लिए गए थे। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और सीपीसीबी द्वारा तय किए गए स्टैंडर्ड पर इनमें से कोई भी सैंपल खरा नहीं उतरा। सभी एसटीपी पर एसएस, सीओडी, बीओडी और एनएच4-एन मानक से कहीं अधिक पाए गए। इसके बाद एसटीपी पर सैपलिंग नहीं की गई है।

जांच में एसटीपी का यह मिला था हाल

बूढ़ी का नगला

जगह, पीएच, एसएस, सीओडी, बीओडी, एनएच4-एन, पीओ4-पी

इनलेट, 7.42, 170, 410, 101, 34.9, 4.62

आउटलेट, 7.88, 72.9, 281, 46.4, 37.3, 5.15

जगनपुर

जगह, पीएच, एसएस, सीओडी, बीओडी, एनएच4-एन, पीओ4-पी

इनलेट, 7.37, 311, 553, 137, 41.5, 4.23

आउटलेट, 7.38, 55, 302, 54.6, 36.7, 4.73

धांधूपुरा

जगह, पीएच, एसएस, सीओडी, बीओडी, एनएच4-एन, पीओ4-पी

इनलेट, 7.34, 284, 560, 123, 44.2, 4.43

आउटलेट, 7.56, 22, 249, 46.5, 45.9, 5.15

देवरी रोड

जगह, पीएच, एसएस, सीओडी, बीओडी, एनएच4-एन, पीओ4-पी

इनलेट, 7.41, 345, 485, 105, 55.6, 6.42

आउटलेट, 7.55, 38.3, 299, 44.4, 44.8, 7.43

यह हैं मानक

पीएच: 6.5-9.0

एसएस: 20

सीओडी: 50

बीओडी: 10

एनएच4-एन: 5

नोट: मानक आउटलेट के लिए मिलीग्राम प्रति लीटर में हैं।

यह हैं फुल फार्म

एसएस: सस्पेंडेड सॉलिड।

सीओडी: केमिकल ऑक्सीजन डिमांड।

बीओडी: बायो-ऑक्सीजन डिमांड।

एनएच4-एन: अमोनिकल नाइट्रोजन।

पीओ4-पी: फास्फेट।

ताज के पास सबसे प्रदूषित मिली यमुना

उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की रिपोर्ट में ताज के पास यमुना सर्वाधिक प्रदूषित पाई गई। यमुना में प्रदूषण की स्थिति पर जनवरी से अगस्त तक की रिपोर्ट नोएडा, मथुरा, आगरा, फीरोजाबाद, प्रयागराज में 20 स्थलों पर लिए गए यमुना जल के सैंपल पर आधारित थी। इसमें ताज के डाउन स्ट्रीम में यमुना सर्वाधिक प्रदूषित मिली थी। यहां टोटल कॉलिफार्म (मानव व जीव अपशिष्ट) का औसत 115625 एमपीएन दर्ज किया गया था। इससे कम यह मथुरा के शाहपुर में 111750 एमपीएन था। टोटल कॉलिफार्म को मोस्ट प्रोबेबल नंबर (एमपीएन) प्रति 100 एमएल में मापा जाता है। पीने के पानी में यह 100 और नहाने के पानी में 500 से अधिक नहीं होना चाहिए। जिस पानी में यह पांच हजार एमपीएन से अधिक हो, उसे ट्रीट नहीं कर सकते हैं।

सिर्फ बारिश में ही स्वच्छ रही शहर की हवा

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट के अनुसार बारिश के चलते जुलाई, अगस्त व सितंबर में हवा में घुले धूल कणों की मात्रा में काफी सुधार हुआ था। ताजमहल पर एसओ2, एनओ2, पीएम 2.5 और पीएम10 मानक के अंदर रहे थे। एत्माद्दौला, रामबाग व नुनिहाई स्थित मॉनीटरिंग स्टेशनों पर भी इसकी मात्र में काफी सुधार था। बारिश थमने के बाद अक्टूबर में ताजमहल, एत्माद्दौला, रामबाग, नुनिहाई स्थित मॉनीटरिंग स्टेशनों पर पीएम 2.5 व पीएम10 में वृद्धि हुई। सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर में ताज पर पीएम 2.5 115 और पीएम10 मानक 158 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किए गए। जबकि यह क्रमश: 40 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होने चाहिए।

स्थानीय कारण जिम्मेदार

अक्टूबर में हवा की गति इतनी तेज नहीं रही कि उसके साथ बहकर धूल कण ताजनगरी तक पहुंचते। वायु गुणवत्ता खराब होने के लिए स्थानीय कारण अधिक जिम्मेदार माने जा रहे हैं। इनमें सड़कों के किनारों पर उचित सफाई के अभाव में धूल कणों का एकत्र होना, कूड़ा-करकट जलना, स्मार्ट सिटी व हाईवे के सिक्स लेन प्रोजेक्ट के काम में मानकों का पालन नहीं किया जाना प्रमुख है।

जून में लांच हुआ था एयर एक्शन प्लान

एनजीटी के आदेश पर तैयार किया गया एयर एक्शन प्लान एक जून को आगरा में तत्कालीन मुख्य सचिव अनूपचन्द्र पांडे ने लांच किया था। इसमें संबंधित विभागों के दायित्व के साथ ही निर्धारित समयावधि की योजनाएं तय की गई थीं। लेकिन यह कागजों से निकलकर हकीकत नहीं बन सका।

इनकी क्‍या है राय

जुलाई, अगस्त व सितंबर में वायु गुणवत्ता में सुधार केवल बारिश की वजह से हुआ था। अक्टूबर में एक बार धूल कण बढ़े हैं। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। अगर वो ढंग से काम करें तो यमुना की यह दशा नहीं हो।

-कमल कुमार, प्रभारी अधिकारी सीपीसीबी

ताज ट्रेपेजियम की बैठकों में होने वाले निर्णयों पर अमल नहीं किया जाता। अधिकारी तदर्थ रोक और यथा स्थिति के आदेश के बावजूद बड़े प्रोजेक्ट का निर्माण नहीं रोक सके हैं। यह न्यायालय की अवमानना है।

डॉ. शरद गुप्ता, पर्यावरणविद्  

Posted By: Tanu Gupta

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