आगरा, जागरण संवाददाता। ताजनगरी में एयर इमरजेंसी के हालात बनने लगे हैं। यहां वायुमंडल की बाउंड्री लेयर (वातावरण में 700 मीटर तक सीमित हुए प्रदूषक तत्व) 700 मीटर तक पहुंच चुका है। इससे गुरुवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) सीजन के सबसे खराब स्तर (317) तक पहुंच गया। 

सुबह ही धुंध छाई रही, दोपहर में कुछ देर के लिए धूप निकली। दोबारा धुंध छा गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के संजय प्लेस स्थित ऑटोमेटिक मॉनीटरिंग स्टेशन पर एकत्र आंकड़ों के अनुसार एक्यूआइ 317 दर्ज किया गया। ये इस सीजन में सर्वाधिक रहा। बुधवार को यह 293 दर्ज किया गया था।

आबोहवा की बहुत खराब स्थिति

सीपीसीबी की गाइड लाइन के अनुसार हवा की यह बहुत खराब स्थिति है। आगरा में दीपावली पर हुई आतिशबाजी से भी इतना अधिक वायु प्रदूषण नहीं हुआ था।

मानक से छह गुना अधिक अति सूक्ष्म कण

एक्यूआइ बढऩे का कारण अति सूक्ष्म कण रहा। यहां हवा में मानक से छह गुना से अधिक अति सूक्ष्म कण घुले रहे। अति सूक्ष्म कणों का सर्वाधिक स्तर 380 दर्ज किया गया, जबकि यह 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। इसका न्यूनतम स्तर भी 260 दर्ज किया गया। कार्बन मोनोऑक्साइड का अधिकतम स्तर 121 दर्ज किया गया। यह मानक से 30 गुणा से अधिक है। यह 4 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए।

सामान्य दिनों में दो किलोमीटर तक होती है बाउंड्री लेयर

वातावरण में कई परत होती हैं, गैस और सूक्ष्म कण बाउंड्री लेयर के नीचे रहते हैं। यह परत सामान्य दिनों में पृथ्वी से दो किलोमीटर से अधिक दूरी पर रहती है। इससे प्रदूषक तत्व बढऩे के बाद भी असर कम दिखाई देता है। मगर, तापमान कम होने और नमी के कारण बाउंड्री लेयर नीचे आ जाती है। आगरा में यह लेयर 700 मीटर तक पहुंच गई है, इससे प्रदूषक तत्व 700 मीटर से ऊपर नहीं जा रहे हैं। साथ ही हवा भी नहीं चल रही। इससे आबोहवा बिगड़ रही है और एक्यूआइ बढऩे लगा है।

प्रदूषक तत्वों का स्तर

प्रदूषक तत्व, न्यूनतम, अधिकतम, औसत

कार्बन मोनोऑक्साइड, 72, 121, 88

सल्फर डाइ-ऑक्साइड, 12, 49, 20

नाइट्रोजन डाइ-ऑक्साइड, 35, 96, 76

ओजोन, 9, 81, 37

अति सूक्ष्म कण, 260, 380, 317

प्रदूषक तत्व एक किलोमीटर से ऊपर पहुंचने के बाद वातावरण में डिस्पर्स हो जाते हैं, इससे एक्यूआइ कम होने लगता है। धूप निकलने और हवा चलने पर ही एक्यूआइ कम होगा।

-डॉ. अजय तनेजा, प्रोफेसर रसायन विज्ञान विभाग डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि

हवा ना चलने, नमी और तापमान में कमी से बाउंड्री लेयर 700 मीटर तक पहुंच गई है। इससे अलग अलग स्रोत से पैदा हो रहे प्रदूषक तत्व आगे नहीं बढ़ रहे हैं और एक्यूआइ बढ़ता जा रहा है।

-डॉ. रंजीत कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर रसायन विज्ञान विभाग दयालबाग शिक्षण संस्थान  

Posted By: Prateek Gupta

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