आगरा, जागरण संवाददाता। हर घर तक रोशनी पहुंचाने वाला विभाग चुनाव के बूथों को अंधेरे में छोड़ गया है। जबकि शासन ने चुनाव की घोषणा से पहले ही इन्हें रोशन करने के निर्देश दिए थे। चुनाव नजदीक है और अब बिजली अधिकारी बूथों को चिराग लेकर ढूंढने में लगे हैं। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लि. (डीवीवीएनएल) 21 जिलों में बिजली आपूर्ति करता है। इन जिलों में चुनाव की घोषणा के बाद बिजली अधिकारियों ने मतदान केंद्रों को तलाशना शुरू कर दिया है। डीवीवीएनएल मुख्यालय को मिली छह जिलों की रिपोर्ट में तीन हजार 488 बूथ अंधेर में डूबे हैं। खुद प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के गृह जनपद में भी 48 मतदान केंद्र ऐसे हैं, जिनमें बिजली कनेक्शन नहीं हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अन्य जिलों की स्थिति बहुत खराब होगी। आगरा में एक हजार से अधिक पोलिंग बूथ हैं जिन तक बिजली नहीं पहुंची है। जालौन के 656 बूथ पर बिजली नहीं है। इसके बाद फर्रुखाबाद में 1185, महोबा में 338, झांसी के 78, हमीरपुर में 23, एटा में 391 और कानुपर देहात के 212 बूथों अंधेरा पसरा रहता है। डीवीवीएनएल मुख्यालय ने सभी जिलों के बिजली अधिकारी व शिक्षा विभाग से बाकी मतदान केंद्रों की सूची मांगी है। इन्हें चुनाव तिथि से पूर्व ही इन बूथों में बिजली आपूर्ति करनी है। अधिकांश स्कूलों में अंधेरा डीवीवीएनएल द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में अधिकांश मतदान केंद्रों (प्राइमरी स्कूल व परिषदीय स्कूलों) में बिजली कनेक्शन नहीं है और जिन मतदान केंद्रों में कनेक्शन हैं। उनमें केबल, मीटर नहीं लगे हैं। स्कूलों में बिजली फिटिंग नहीं हुई है या फिर स्कूलों तक पहुंचने वाली विद्युत लाइन के पोल नहीं गढ़े हैं। छात्र-छात्राओं को होती है परेशानी गर्मी के मद्देनजर बिजली विभाग को हर उपभोक्ता को 24 घंटे बिजली आपूर्ति करनी है। लेकिन जिन सरकारी स्कूलों में बिजली नहीं है। वहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को गर्मी में मुसीबत झेलनी पड़ती है।

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