यशपाल चौहान, आगरा: चोरी भले ही पुलिस के लिए गंभीर अपराध न हो लेकिन, इसका दर्द उनसे पूछो, जिनकी जिंदगी भर की कमाई चोर ले गए। मुकदमा दर्ज हुआ। थाने के चक्कर लगाए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। जिले के 38 थानों में एक साल में दर्ज मुकदमों और उनमें पुलिस की कार्रवाई पर गौर करें तो हकीकत समझ में आ जाती है। आंकड़े यही साबित करते हैं कि चोरी के मुकदमों में पुलिस कामचोरी करती है।

जिले में हर दिन करीब दो से अधिक चोरी की घटनाएं पुलिस के आंकड़ों में दर्ज हो रही हैं। मगर, इनके पर्दाफाश की स्थिति बहुत बुरी है। 'दैनिक जागरण' ने हकीकत जानने के लिए तीन माह पहले एसएसपी कार्यालय में सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्रार्थना पत्र दिया। इसमें एक जनवरी 2017 से एक जनवरी 2018 के बीच जिले के सभी थानों में हुई चोरी की घटनाएं और उनके पर्दाफाश का ब्योरा मांगा था। इसमें यह भी सूचना मांगी गई थी कि चोरी की इन घटनाओं में कितनी नकदी और कितने गहने आदि चोरी हुए और कितने बरामद हुए? इसके अलावा चार्जशीट और एफआर की भी जानकारी मांगी थी। तीन माह बाद एसएसपी कार्यालय से सूचना मिली। इसके बाद भी एमएम गेट और नाई की मंडी थाने ने सूचना नहीं दी। एसएसपी कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जिले के 38 थानों में एक वर्ष में चोरी के कुल 1311 मुकदमे दर्ज हुए। इनमें केवल 251 का पुलिस पर्दाफाश कर चार्जशीट लगा सकी। 14 में अभी विवेचना चल रही है। आरटीआइ के जवाब में कुछ थानों द्वारा ही एफआर लगाने की जानकारी दी गई। इसलिए यह संख्या केवल 141 है। पुलिस सूत्रों की मानें तो चार्जशीट और पेंडिंग विवेचना के मामलों को छोड़ दें तो 1046 ऐसे मुकदमे हैं, जिनमें से पुलिस अधिकतर में एफआर लगाकर काम खत्म कर चुकी है या करने वाली है। यह आंकड़े इस बात की गवाही देने के लिए काफी हैं कि पुलिस चोरी के मुकदमों में पर्दाफाश के कितने प्रयास करती है।

एसआर केस से ऐसे बचती है पुलिस

शासनादेश के मुताबिक लूट, डकैती, हत्या, दुष्कर्म समेत पांच लाख रुपये से ऊपर की चोरी भी स्पेशल रिपोर्ट (एसआर) की श्रेणी में आती है। मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही एसआर केस की रिपोर्ट डीआइजी स्तर से दी जाती है। इसलिए इसकी सख्त मॉनीट¨रग होती है। मगर, चोरी के मामले में पुलिस मुकदमे में रकम नहीं खोलती ताकि एसआर रिपोर्ट भेजने से बच जाए। केस डायरी के पहले पर्चे में वादी के बयानों में चोरी की रकम और सामान खोल दिया जाता है। इससे केवल सीओ स्तर तक की मॉनीट¨रग होती है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी न खुली शहर की सबसे बड़ी चोरी

एक साल पहले जगदीशपुरा में 22 अप्रैल 2017 को जूता कारोबारी के घर दो करोड़ की चोरी हुई थी। दो चोर सीसीटीवी कैमरे में रिकार्ड हुए। मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चोरी के पर्दाफाश के निर्देश दिए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इस घटना के एक साल बाद ठीक उसी अंदाज में 17 मई को शाहगंज में सर्राफ के घर से दो करोड़ से अधिक की चोरी हुई थी। मुकदमे में रकम पचास लाख लिखी गई। इसमें भी दो चोर थे और सीसीटीवी कैमरे में तस्वीर कैद हुई। मगर, इस केस में भी पुलिस बेसुराग है।

नहीं होते हैं पर्दाफाश के प्रयास

शहर में छोटे गिरोहों से लेकर शातिर अपराधी अब लूट के बजाय चोरी की वारदात कर रहे हैं। पुलिस के पास इनका कोई रिकार्ड ही नहीं है। मुखबिर तंत्र पूरी तरह फेल है और घटना के बाद पर्दाफाश को पुलिस गंभीरता से प्रयास भी शुरू नहीं करती है। किसी एक गैंग के पकड़े जाने पर छोटी-छोटी चोरी की घटनाएं उस पर खोल दी जाती है। इससे अपराधियों का दुस्साहस बढ़ रहा है।

चोरी में टॉप पर हैं ये थाने

थाना- मुकदमे-एफआर-चार्जशीट

ताजगंज-248-सूचना नहीं दी-24

एत्माद्दौला-157-सूचना नहीं दी-39

न्यू आगरा-71-सूचना नहीं दी-17

सिकंदरा-66-सूचना नहीं दी- 12

खंदौली- 53- सूचना नहीं दी-15

जगदीशपुरा-57-सूचना नहीं दी-5

शाहगंज-170-सूचना नहीं दी-26

फतेहपुरसीकरी-57-सूचना नहीं दी-11

रकाबगंज-64-सूचना नहीं दी-9

डकैती और लूट के मामले भी चोरी के साथ दफन

पुलिस ने डकैती और लूट के मुकदमे भी चोरी में दर्ज कर लेती है। एक साल में दर्ज चोरी के मुकदमों में बड़ी संख्या इनकी होगी। आशंका है कि पुलिस ने इन संज्ञेय अपराधों को चोरी में दर्ज कर एफआर लगाकर दफन कर दिया।

दो थानों में एक साल में नहीं हुई चोरी

सैंया और खेड़ा राठौर गांव में एक जनवरी 2017 से एक जनवरी 2018 तक चोरी की कोई घटना नहीं हुई। पुलिस के आकड़ों में इन थानों में इस समयावधि में चोरी का कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। हर मुकदमे की एफआर में एक कहानी

पुलिस चोरी के अधिकतर मुकदमों की एफआर में एक ही कहानी लिखती है। विवेचक घटना के बाद तमाम प्रयासों का जिक्र करते हुए चोरों का सुराग न मिलने की बात कहते हुए अंतिम रिपोर्ट लगा देता है। कुछ मामलों में तो पुलिस ने नकदी और गहने चोरी की घटनाओं को फर्जी बताकर मुकदमे खत्म कर दिए।

चोरी की घटनाओं को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए जाते रहते हैं। समय-समय पर उनके पर्दाफाश भी होते हैं। कुछ बड़ी घटनाओं के पर्दाफाश को अब क्राइम ब्रांच को टास्क दिया गया है।

अमित पाठक, एसएसपी

Posted By: Jagran