आगरा, जागरण संवाददाता। ताजनगरी से लाखों रुपये के कफ सीरप की तस्करी करने वालों को दो महीने बाद भी पुलिस तलाश नहीं कर सकी। आगरा से सस्ते नशे की तस्करी के तार सिलीगुड़ी से लेकर बांग्लादेश तक जुड़े बताए गए थे। गंध रहित सस्ते नशे के रूप में फेंसिडिल समेत अन्य कफ सीरप का कारोबार नशाबंदी वाले राज्यों में दवा के रूप में खुलेआम चल रहा है। इस वर्ष सिर्फ बांग्लादेश की सीमा पर ही इस सीरप की दो लाख से ज्यादा बोतल पकड़ी जा चुकी हैं।

वाराणसी एसटीएफ की टीम ने 15 अगस्त को आजमगढ़ में फेंसिडिल कफ सीरप लेकर सिलीगुड़ी जा रहे ट्रक को पकड़ा था। यह ट्रक आगरा से भेजा गया था। ट्रक की तलाशी लेने पर उसमें कफ सीरप की 39,900 बोतल बरामद की थीं। एसटीएफ द्वारा ट्रक चालक और क्लीनर से पूछताछ करने पर उन्होंने सिकंदरा के फैक्ट्री एरिया के किसी गोदाम से माल लोड करने की जानकारी दी थी। चालक को माल सिलीगुड़ी पहुंचाना था। वहां इसकी तस्करी से जुड़ी पार्टी फोन करके माल को उतारने की जगह बताती। चालक कफ सीरप की खेप भेजने वाले के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सका था।

एसटीएफ द्वारा चालक से काफी पूछताछ की गयी थी। माल भेजने वाले ने चालक को सिर्फ यही बताया था कि वह खांसी की दवा भेज रहा है। उसे पेटियां खोलकर दिखाईं, इसमें कफ सीरप की बोतलें रखी थीं । चालक को दवा ले जाने में कुछ गड़बड़ी नजर नहीं आयी थी। माल पहुंचाने पर भाड़े के अलावा पांच हजार रुपये ज्यादा मिल रहे थे। इय लालच में वह माल लेकर जा रहा था। वाराणसी एसटीएफ को कफ सीरप की तस्कारी के तार कोतवाली के दवा मार्केट से जुड़े होने की आशंका थी। इसलिए उसने स्थानीय पुलिस को भी इस बारे में अवगत कराया था।

गंध रहित नशे का केंद्र है सिलीगुडी

सिलीगुड़ी उत्तरी बंगाल का प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र है । यह पूर्वोत्तर भारत का गुवाहाटी के दूसरा सबसे बडा नगर है। बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए लोगों के लिए रेल्र, सड़क और हवाई यात्रा का पडाव बिंदु है। इसलिए नशे के रूप में प्रयोग होने वाले कफ सीरप की बड़ी खेप को सिलीगुड़ी मंगाने के बाद उसे अन्य राज्यों और बांग्लादेश तक भेजा जाता है ।

ज्यादा सेवन बनाता है नशे का आदी

फेंसिडिल और इस फार्मूले के तहत तैयार अन्य कफ सीरप का ज्यादा मात्रा में सेवन करने से नशा हाे जाता है । यह सीरप खांसी से पीड़ित मरीजों को डॉक्टरों की सलाह पर निर्धारित मात्रा में दिया जाता है । इसका ज्यादा इस्तेमाल किसी काे भी इसका आदी बना देता है ।ज्यादा मात्रा में लगातार सेवन करने से शरीर पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है ।

सीरप की तस्करी का बढ़ता कारोबार

ताजनगरी से दूसरे राज्यों को कफ सीरप की तस्करी का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है। इसे लेकर दवा मार्केट में राजस्थान और पंजाब समेत अन्य राज्यों की पुलिस कई बार छापा मार चुकी है। इसकी तस्करी बांग्लादेश तक होती है। पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश की जो सीमा लगती है उसे सीमा सुरक्षा बल वाले दक्षिण बंगाल फ्रंटियर का नाम देते हैं।

कफ सीरप की तस्करी के प्रमुख तथ्य

- वर्ष 2019 में फेंसिडिल सीरप की सात लाख 79 हजार से ज्यादा बोतल पकड़ी गयीं ।

- वर्ष 2018 में सात लाख 15 हजार बोतल पकड़ीं ।

- बांग्लादेश में सीरप की एक बोतल की कीमत पहले 400 से 500 टका थी ।

- अब वहां इसकी कीमत एक हजार से 1200 टका हो गयी है । 

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