आगरा, प्रभजोत कौर। जल, जिसके बिना जीवन की कल्पना भी दूभर है। वैज्ञानिक अपनी धरती के अलावा अन्य ग्रहों पर भी पानी की तलाश कर रहे हैं। ताजनगरी में जलसंकट को दूर करने के लिए ही गंगाजल लाना पड़ा। वहां, जल संचयन की स्थिति काफी निराशाजनक है। पर इसी निराशाजनक स्थिति में ताजनगरी में कुछ कालोनियों, गुरुद्वारा और स्कूलों ने आस की एक उम्मीद दिखाई है। ये लोग मिलकर रेन वाटर हार्वेस्टिंग से बरसात की हर बूंद को बचाने की कोशिशों में लगे हैं।

परेशानियों के बीच निकाला रास्ता

शहर की बीचों-बीच स्थित भरतपुर हाउस कालोनी के लोगों ने बरसात के दिनों में होने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए ऐसा कदम उठाया, कि वे अब दूसरों के लिए नजीर बन गए हैं। आठ वर्ष पहले तक भरतपुर हाउस के लिए बारिश खुशनुमा मौसम नहीं, संकट लेकर आती थी। समाधान के लिए तत्कालीन अध्यक्ष और वर्तमान संरक्षक पूरन डावर ने इसके स्थाई समाधान को लेकर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित कराने पर विचार किया। कालोनी की बैठक में इस प्रस्ताव को रखा गया, जिसके बाद अधिकतर ने सहमित जताई। पार्क में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाया गया। अब इस कालोनी में मुख्य सड़क से कालोनी में आने वाले पानी को कालोनी के तीन में से सबसे आखिरी वाले पार्क में पहुंचा दिया जाता है। इस पार्क के दो किनारों पर दो बड़े चैंबर बने हुए हैं, जिसमें शोधित होकर पानी भूगर्भ में चला जाता है। कालोनी में बच्चों के लिए बने पार्क में भी हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही कालोनी के मंदिर में भी सिस्टम लगवाने की योजना है। भरतपुर हाउस रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के संरक्षक पूरन डावर बताते हैं कि अब बारिश की हर बूंद को सहेजते हैं। अब कालोनी में गंदगी नहीं बल्कि बरसात के बाद स्वच्छता नजर आती है।

पानी की हर बूंद का दोबारा करते हैं इस्तेमाल

गुरुद्वारा गुरु का ताल में पानी की हर बूंद को बचाने का प्रयास होता है। बर्तन धोने से लेकर गऊशाला और गुरुद्वारा परिसर में रहने वाले परिवारों के द्वारा इस्तेमाल होने वाले पानी तक को छोटी-छोटी टंकियों में एकत्र कर एक बड़े जलाशय में पहुंचाया जाता है। इस जलाशय का पानी खेती में इस्तेमाल होता है। जलाशय में हर वक्त आठ से नौ फुट पानी रहता है। पहले गुरुद्वारा परिसर में 10 से ज्यादा बोरिंग थी, इससे पानी का दोहन ज्यादा हो रहा था। अब सभी बोरिंग बंद करा कर एक ही बोरिंग रखी गई है। इसी बोरिंग से हर दूसरे दिन परिसर में बनी चार लाख लीटर की पानी की टंकी को भरा जाता है। बरसात का पानी भी सहेजा जाता है। बरसात का पानी भी जलाशय में ही जाता है। गुरुद्वारा परिसर में नालियों में छोटे-छोटे गेट बनाए हुए हैं, जो अधिक बरसात होने पर खोल दिए जाते हैं, जिससे पानी बहकर परिसर के बाहर के नाले में चला जाए। संत बाबा प्रीतम सिंह ने बताया कि हम बरसात की हर बूंद को सहेजने को कोशिश करते हैं।यही नहीं, गुरुद्वारा परिसर में इस्तेमाल होने वाले पानी की हर बूंद को दोबारा इस्तेमाल किया जाता है।

फिल्म देख कालोनी वाले हुए जागरूक

टेढ़ी बगिया के सती नगर कालोनी में 10 घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लग चुका है। पार्क में 55 हजार लीटर का टैंक बनाया गया है, जिसमें बरसात का पानी एकत्र होगा। 2016 में केंद्र सरकार के जल शक्ति अभियान के तहत एक महीने पहले यहां लोगों को नगर निगम ने क्योर इंडिया के माध्यम से जल संरक्षण से संबंधित फिल्म दिखाई थी। पानी को बचाने के उपाय बताए थे। इससे लोग जागरूक हुए। कालोनी में 250 घर हैं, जिसमें से 10 घरों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लग चुका है। यही नहीं, सेंट्रल फॉर अर्बन एंड रीजनल एक्सीलेंस (क्योर) के सहयोग से पार्क में एक टैंक भी बनाया गया है। इसकी क्षमता 55 हजार लीटर की है। टेढ़ी बगिया स्थित एक स्कूल में भी पानी सहेजा जा रहा है, यहां पढ़ने वाले 350 छात्र इसी पानी को पीते हैं। टेढ़ी बगिया के लोग तो जल संरक्षण में एक मिसाल कायम कर ही रहे हैं अन्य क्षेत्रों के लोग भी जागरूक हो रहे हैं। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार ईदगाह में 15, ताजगंज में 16 और घटिया आजम खां में 10 लोगों ने रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया हुआ है।क्योर के प्रोजेक्ट हैड राजीव कुमार ने बताया कि इस कालोनी के लोग जागरूक हो गए हैं। अब दूसरी कालोनियों के लोगों को भी जागरूक कर रहे हैं।

पूरा साल नहीं होती पानी की कमी

टेढ़ी बगिया निवासी कुसुम गौड़, जो एक स्कूल की प्रधानाचार्य हैं, ने बरसात के पानी की हर बूंद को बचाने के लिए एक मिशन शुरू किया। इस मिशन का ही नतीजा है स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को साल भर तक पीने के पानी की कमी नहीं होती है। एक जूनियर स्कूल की प्रधानाचार्य कुसुम को रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाने के लिए क्योर संस्था के मुकुट सिंह राजपूत का सहयोग मिला। उनके सहयोग से स्कूल में दो कुंए खुदवाए गए। इनमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग का प्लांट लगाया गया। कुसुम ने बताया कि अब एक कुएं से ही उनको इतना पानी मिल जाता है कि साल भर का बच्चों के ऊपर खर्च होने वाले पानी की पूर्ति कर देता है। जबकि एक कुआं तो प्रयोग में ही नहीं आ पाता। एक समय वह था जब बच्चों को छोटी छोटी बोतलों में भरकर पानी लेकर आना पड़ता था। यह पानी भी शुद्ध नहीं था। आज बच्चों को शुद्ध पानी वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट के द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में कुसुम के पास जूनियर के साथ ही प्राइमरी स्कूल का भी चार्ज है। जूनियर स्कूल में 80 हजार लीटर की क्षमता का टैंक है तो वहीं प्राइमरी स्कूल में 50 हजार लीटर की क्षमता का टैंक है।

Edited By: Prateek Gupta