आगरा, यशपाल चौहान। मुगल काल के शक्तिशाली शासक रहे अकबर का रंगमहल अब दबंगों के कब्जे में हैं। संरक्षित स्मारक पर अवैध कब्जे के बाद एएसआइ के महानिदेशक ध्वस्तीकरण आदेश कर चुके हैं। अब यह हिस्सा पर्यटकों के लिए भी बंद कर दिया गया है। हालात ऐसे हैं कि अब अधिकारी इस हिस्से में जाने से भी कतराते हैं। संरक्षित स्मारक में कई अन्य हिस्से भी इसी तरह अतिक्रमण की गिरफ्त में हैं।

मुगल काल में अकबर ने फतेहपुर सीकरी में अपनी राजधानी बनाई। यहां बनवाए गए इस किले की स्थापत्य कला तो महत्वपूर्ण है ही। सुरक्षा की दृष्टि से भी बारीक बातों का ध्यान रखा गया था। मुगल शासक का यह ऐतिहासिक कला अब संरक्षित स्मारक है। अब तक जागरण ने इसके आसपास के हालात की असल तस्वीर दिखाई थी। अंदर के हालात भी कुछ ऐसे ही हैं। अकबर का रंग महल भी अतिक्रमण के शिकंजे में है। यह जहांगीर का जन्मस्थल भी है। अवैध कब्जे के बाद एएसआइ ने स्मारक के इस हिस्से को ही बंद कर दिया है। यहां पर्यटकों को नहीं जाने दिया जाता। रंग महल में सात अवैध निर्माण एएसआइ ने चिह्न्ति किए हैं। वर्ष 2013 में इनके ध्वस्तीकरण के आदेश महानिदेशक एएसआइ द्वारा किए गए। मगर, कुछ नहीं हुआ। ये आदेश जिलाधिकारी कार्यालय में आने के बाद अब तक अमल नहीं हो सका। बुलंद दरवाजे के पास स्थित जेरे हमाम का भी यही हाल है। यह अकबर के राज्य के दास और दासियों का स्नानागार था। यहां भी अवैध निर्माण हो चुका है। हजरत चिश्ती का खताई खाना खुर्द -बुर्द होने की कगार पर है। हजरत चिश्ती का मशहूर तबरुक (नान खताई) आज भी प्रचलित है। इसे बनाने वाले भवन पर अब अवैध निर्माण हो चुका है। एएसआइ ने फतेहपुर सीकरी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।

सरकारी जमीनों पर भी कब्जे

बुलंद दरवाजे के पास स्थित सरकारी स्कूल में अब ढाबा चलता है। ये जमीन भी लोगों ने कब्जा ली। वहीं कई स्थानों पर सरकारी जमीन अधिकारियों की मिलीभगत से लोगों ने कब्जा लीं।

दिल्ली दरवाजे तक कब्जा

लाल दरवाजे से दिल्ली दरवाजे तक शाही दीवार से सटे दर्जनों निर्माण हुए। एएसआइ ने मुकदमे भी कराए। ध्वस्तीकरण आदेश होने के बाद भी इनका कुछ नहीं बिगड़ा।

 

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Posted By: Tanu Gupta

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