आगरा, जागरण संवाददाता। नर्सिग का जनरल नर्सिग मिडवाइफरी (जीएनएम) कोर्स बंद होने से एसएन सहित 10 निजी नर्सिग स्कूल पर ताले लटक जाएंगे। पहले से ही नर्सेज की कमी से जूझ रहे निजी और सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा जाएंगी। इंडियन नर्सिग काउंसिल ने 2020-21 सत्र के बाद जीएनएम कोर्स बंद कर दिया है। इसके बाद बीएससी नर्सिग डिग्रीधारक ही अस्पतालों में नर्स का काम कर सकेंगे। इससे एसएन में संचालित नर्सिग स्कूल भी बंद हो जाएगा, यहां जीएनएम की 60 सीटें हैं। शहर के बड़े हॉस्पिटल सहित 10 निजी नर्सिंग स्कूल हैं। इनमें से अधिकांश नर्सिग स्कूलों में इंटरमीडिएट के बाद जीएनएम, (तीन साल का कोर्स) और ऑक्सिलरी नर्स मिडवाइफरी (एएनएम, दो साल का कोर्स) कराया जा रहा है। इन स्कूलों में जीएनएम और एएनएम की 40 और 60 सीटें हैं। ये स्कूल स्टेट मेडिकल फैकल्टी से संबद्ध हैं। उधर, सरकारी अस्पतालों के साथ ही निजी अस्पतालों में नर्स की कमी है। इन अस्पतालों में जीएनएम और एएनएम करने के बाद नर्स काम कर रही हैं। इन कोर्स के बंद होने से नर्स की कमी और अधिक हो जाएगी, इससे स्वास्थ्य सेवाएं और खराब हो सकती हैं। आइएमए ने द्वारा इन कोर्स को बंद ना करने के लिए स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजा गया है। एसएन में बंद पड़ा बीएससी नर्सिग कॉलेज, कड़े मानक एसएन में तीन साल पहले बीएससी नर्सिग कॉलेज खुलना था, इसके लिए इंडियन नर्सिग काउंसिल से अनुमति भी मिल गई। मगर, आंबेडकर विवि से संबद्धता की प्रक्रिया पूरी न होने से कॉलेज नहीं खुल सका है। निजी नर्सिग स्कूलों के लिए बीएससी नर्सिग कोर्स शुरू करना मुश्किल है, इसके लिए प्राचार्य की न्यूनतम अर्हता एमएससी नर्सिग के साथ 15 साल का अनुभव होना चाहिए। इनकी संख्या बहुत कम हैं। ये है हाल बीएससी नर्सिग - इंटरमीडिएट के बाद चार साल का कोर्स, साढ़े तीन से चार लाख रुपये शुल्क जीएनएम - इंटरमीडिएट के बाद तीन साल का कोर्स, दो लाख रुपये शुल्क एएनएम - इंटरमीडिएट के बाद दो साल का कोर्स, डेढ़ लाख रुपये शुल्क नर्सिग कॉलेज में बीएससी नर्सिग कोर्स शुरू करने के लिए आवेदन किया जाएगा, जिससे जल्द कोर्स शुरू हो सके। डॉ. जीके अनेजा, प्राचार्य एसएन मेडिकल कॉलेज नर्स की शॉर्टेज है, ऐसे में जीएनएम कोर्स बंद करने से स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ेगा। यह छोटे हॉस्पिटल को बंद करने की साजिश है, स्वास्थ्य मंत्री को जीएनएम कोर्स बंद ना करने के लिए पत्र भेजा गया है। डॉ. रवि मोहन पचौरी, अध्यक्ष निर्वाचित आइएमए, आगरा

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