जागरण टीम, आगरा। कागारौल के बैमन गांव के सिपाही लोकेंद्र सिंह चाहर के स्वजन को चार माह बाद भी न्याय नहीं मिल सका है। आगरा और अलीगढ़ के पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट-काटकर परेशान परिवार ने हर संभव कोशिश की लेकिन न तो उनकी रिपोर्ट लिखी गई और न ही उनकी सीबीआइ जांच की मांग पर किसी ने गौर किया।

अलीगढ़ पुलिस कंट्रोल रूम में तैनात कांस्टेबल लोकेंद्र सिंह चाहर का आठ मार्च को अलीगढ़ के एक होटल में फंदे पर लटका शव मिला था। पिता रामभरोसी कहते हैं कि उन्हें सुबह 11 बजे अलीगढ़ से एक सब इंस्पेक्टर ने यह सूचना दी। जब तक स्वजन पहुंचे शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया। आरोप है कि पुलिस ने घटनास्थल की ठीक से जांच भी नहीं की। स्वजन न्याय के लिए अलीगढ़ के एसएसपी से लेकर एडीजी आगरा राजीव कृष्ण से मिले। घटना की सीबीआइ जांच की मांग की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। स्वजन का आरोप है कि होटल में बेटे लोकेंद्र की हत्या की गई है। अलीगढ़ के गांधी पार्क थाने में गए लेकिन पुलिस ने तहरीर नहीं ली। मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी की थी शिकायत

पिता रामभरोसी ने बताया कि बेटे की मौत की निष्पक्ष जांच को उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की लेकिन किसी ने उनसे संपर्क नहीं किया। उनकी मांग पर जांच तक नहीं की गई। क्षेत्र के युवाओं ने मोटरसाइकिल पर स्टीकर चिपका कर लोकेंद्र को न्याय दिलाने की मांग उठायी

साथी को न्याय दिलाने के लिए गांव के युवा सामने आ रहे हैं। उन्होंने अपने वाहनों के आगे स्टीकर चिपकाए हैं। इस पर 'सिपाही लोकेंद्र सिंह चाहर को न्याय दो, उसकी हत्या का पर्दाफाश करो, हत्यारों को फांसी की सजा दिलाओ।' अंकित है। गांव के धीरेंद्र चाहर, केशव प्रधान, जवाहर सिंह, महेश सिंह, सुखेश, निर्भीक चाहर, नरेंद्र सिंह, रौनी चाहर, डीके रावत, गुड्डू सिह आदि का कहना है कि इस मुहिम से वे पुलिस व प्रशासन की आंखें खोल रहे हैं, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

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