आगरा, कुलदीप सिंह। गर्मी की छु‍ट्टि‍यों में पसंदीदा खेल में पारंगत होने के लिए एकलव्य स्टेडियम पहुंच रहे खिलाडिय़ों को मायूसी हाथ लग रही है। अधिकांश खेलों के कोच की नियुक्ति न होने से खिलाडिय़ों को खुद ही अभ्यास करना पड़ रहा है। स्टेडियम में सिर्फ तीन खेलों के ही कोच मौजूद हैं।

एकलव्य स्टेडियम में एक अप्रैल से नया सत्र शुरू होता है। सत्र शुरू होने से पहले ही कोच की नियुक्ति हो जाती है, लेकिन इस बार संविदा पर तैनात कोच का कार्यकाल फरवरी में समाप्त होने के बाद इनका नियमितीकरण नहीं किया गया। नया सत्र शुरू होने के बाद जब खिलाड़ी स्टेडियम में रजिस्ट्रेशन के लिए पहुंचे तो पहले उन्हें कोच न होने का हवाला दिया गया, बाद में रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिए गए। आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश में खिलाडिय़ों की संख्या में आगरा का चौथा सबसे बड़ा स्टेडियम है। हैरान करने वाली बात यह है कि अप्रैल से खिलाडिय़ों का पंजीकरण शुरू हो चुका है, लेकिन क्रिकेट, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बास्केटबाल, कुश्ती, बॉक्सिंग, हॉकी, तलवारबाजी, तैराकी आदि के कोच नहीं हैं। इसके लिए पहल भी नहीं की गई है। इन खेलों में पिछले सत्र में अस्थाई कोच मौजूद थे, लेकिन इनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद नियमितीकरण प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी की ओर से शासन को कोच दिलाए जाने का प्रस्ताव भेजा गया है, मगर अभी तक शासन की ओर सुनवाई नहीं हुई है।

बिना कोच हो रहे रजिस्ट्रेशन

क्रिकेट 150

बैडमिंटन 40

बास्केटबाल 34

एथलेटिक्स 17

तैराकी 48

डेढ़ दर्जन से अधिक खेलों का प्रशिक्षण

एकलव्य स्पोट्र्स स्टेडियम में करीब डेढ़ दर्जन खेलों का प्रशिक्षण खिलाडिय़ों को दिया जाता है। यहां केवल फुटबाल, टेबल टेनिस और जिमनास्टिक में ही स्थायी कोच हैं। जिमनास्टिक के जहां तीन कोच हैं, वहीं फुटबाल व टेबल टेनिस में एक-एक कोच हैं। इन खेलों के अलावा क्रिकेट, हॉकी, एथलेटिक्स, कबड्डी, मुक्केबाजी, बैडमिंटन, ताइक्वांडो, वॉलीबाल, पॉवरलिफ्टिंग, तलवारबाजी व बास्केट बाल में एडहॉक मौजूद थे।

दस माह का होता है कार्यकाल

एडहॉक कोचों की तैनाती साल में 10 माह के लिए होती है। अप्रैल से जनवरी तक इनका कार्यकाल रहता है। स्टेडियम के एक दर्जन एडहॉक कोचों का कार्यकाल खत्म हो गया है।

लाइव सेवर के सहारे चलता है स्वीमिंग पूल

एकलव्य स्पोट्र्स स्टेडियम में स्विमिंग पूल बने दो दशक हो चुके हैं, लेकिन यहां स्थायी छोडि़ए एडहॉक कोच तक नहीं है। पिछला सत्र लाइफ सेवर के सहारे निकाला गया।

बिना कोच अभ्यास कर रहे खिलाड़ी

बिना कोच के ही खिलाड़ी अभ्यास के लिए मैदान पर उतर रहे हैं। ऐसे में कभी भी इनके साथ हादसा हो सकता है। बिना कोच के अभ्यास करने से खिलाडिय़ों के चोटिल होने की स्थिति बनी रहती है।

खेल निदेशालय से चल रही बातचीत

कोच की नियुक्ति के लिए खेल निदेशालय से बातचीत की जा रही है। चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद तत्काल कोच की नियुक्ति की जाएगी।

सुनील जोशी, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी 

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Posted By: Tanu Gupta

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