आगरा, जेएनएन। जब से एटा के गांव रेजुआ में यह खबर पहुंची है कि राजेश यादव शहीद हो गए हैं तब से वहां कोहराम मचा है। सेना के इस जांबाज की वीरता का हर कोई बखान कर रहा है। मां रामवती बदहवास हैं, बार- बार बेसुध हो जाती हैं। रोते-रोते कहती हैं कि अब तो एक ही इच्छा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक के बदले दस सिर लाएं तब ही बदला पूरा हो सकेगा। मां के अंदर इस बात को लेकर गुस्सा है कि सरकार बार-बार पाकिस्तान को सबक सिखाने की बात करती है, लेकिन आज तक इस मामले पर राजनीति के अलावा और कुछ नहीं कर सकी। वे सवाल उठा रहीं हैं कि क्यों पाक को सबक नहीं सिखाया जाता, आखिर कब तक कोखें सूनी होती रहेंगी।

रेजुआ में चौतरफा मातम पसरा हुआ है। गुरुवार रात श्रीनगर से आई सेना के एक अधिकारी की फोन कॉल ने पूरे परिवार के होश उड़ा दिए। घर में हाहाकार मचने लगा और देखते ही देखते यह खबर पूरे गांव में फैल गई कि जांबाज राजेश यादव पाकिस्तान द्वारा किए गए युद्ध विराम उल्लंघन के दौरान फायङ्क्षरग में शहीद हुए हैं। सुबह होते ही पूरे क्षेत्र में शहादत की खबर फैल चुकी थी और लोगों का जमावड़ा घर पर होने लगा। बूढ़ी मां रामवती अपने बेटे की याद में बार- बार बेसुध हो जाती हैं। कभी वे सरकार को कोसती हैं तो कभी कहती हैं कि कम से कम दस मार दो। ऐसी मौत मारो कि कोई भारत पर हमला करने की जुर्रत न कर सके। शहीद की मां की इस ख्वाहिश ने ग्रामीणों को भी गुस्से से भर दिया। उन्होंने एकत्रित होकर पाकिस्तान के खिलाफ जमकर आक्रोश जताया और नारेबाजी की।

 

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पत्नी बोली बेटा हुआ तो सेना में भेजूंगी
शहीद राजेश यादव की पत्नी श्वेता सात माह की गर्भवती हैं, लेकिन इस असहज स्थिति में भी अपने पति की तरह देशभक्ति का जज्बा कूट-कूटकर भरा है। वे कहतीं हैं कि उन्हें पति की शहादत पर गर्व, मगर उनसे हमेशा के लिए बिछडऩे का गम है। वे अपनी निशानी छोड़कर गए हैं, अगर बेटा हुआ तो सेना में भेजूंगी, ताकि पिता की मौत का बदला ले सके।
एटा के कासौन निवासी श्वेता का विवाह मई 2015 में राजेश के साथ हुआ था। किंतु अभी तक उन पर कोई संतान नहीं है। श्वेता सात माह की गर्भवती हैं। पत्नी श्वेता ने बताया कि गुरूवार को सुबह मैस में भोजन करते समय उसकी पति के साथ बात हुई थी। राजेश ने घर में सभी से बात की थी। वहीं मार्च में आकर बहन विनीता की शादी के लिए लड़का देखने को कहा था। वो तो नहीं आए लेकिन शाम को ही उनकी मौत की खबर आ गई।

होमगार्ड हैं पिता
शहीद राजेश के पिता नेम सिंह होमगार्ड में सेवारत हैं। राजेश अपने मां-बाप का इकलौता पुत्र थे। घर का इकलौता चिराग बुझ जाने से पिता सकते में हैं। नेम सिंह रो- रोकर बार- बार कहते हैं कि भगवान ने मेरी बुढ़ापे की लाठी तोड़ दी।

बहनों ने कहा अब किसको बांधेंगे राखी
शहीद राजेश चार बहनों के इकलौता भाई थे। राजेश की मौत के कारण बहनों का बुरा हाल है। उनकी बहनों ने बताया कि राजेश उनका इकलौता भाई होने के कारण सबके दुलारे थे, अब उनके जाने के बाद उनकी राखी भी सूनी हो गई। अब हम भला किसको राखी बांधेंगे।
 

Posted By: Prateek Gupta