आगरा, जागरण संवाददाता। पबजी के आदी छात्र ने लखनऊ में अपनी मां की हत्या कर दी थी, इसके बाद से आगरा में भी अभिभावक परेशान हैं। जिला अस्पताल, एसएन, मानसिक रोग संस्थान के साथ ही निजी मनोचिकित्सकों के क्लीनिक पर मोबाइल गेम और मोबाइल के आदी बच्चों को लेकर परिजन पहुंच रहे हैं। इन बच्चों का काउंसिलिंग और दवाओं से इलाज किया जा रहा है।

केस वन - दो साल नौ महीने की बच्ची को मोबाइल की लत लगने पर स्वजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। काउंसिलिंग में सामने आया कि मोबाइल न मिलने पर बच्ची मारना पीटना शुरू कर देती है, मोबाइल हाथ में न हो तो खाना नहीं खाती है।

केस टू - छठवीं कक्षा के छात्र का पढ़ाई में मन नहीं लगता था, एसएन में काउंसिलिंग की गई। इसमें सामने आया कि बच्चे को मोबाइल की लत लग गई, वह छह से सात घंटे मोबाइल पर गेम खेलता रहता है। इससे पढ़ाई में मन नहीं लगता है।

एसएन मेडिकल कालेज के मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डा. विशाल सिन्हा ने बताया कि लखनऊ में हुई घटना के बाद 20 प्रतिशत मरीज बढ़ गए हैं। जो बच्चे दो घंटे से अधिक बिना काम के मोबाइल इस्तेमाल कर रहे हैं उन्हें इसकी लत लग सकती है। ऐसे बच्चों की काउंसिलिंग की जा रही है, बच्चों का दवाएं भी देनी पड़ रही हैं। जिला अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डा. ज्ञानेंद्र वर्मा ने बताया कि बच्चों में मोबाइल की लत को छुड़ाने के काउंसिलिंग के साथ थैरेपी दी जा रही है।

थैरेपी से इस तरह किया जा रहा इलाज

रिवार्ड -परिजनों को बच्चे से कहना है कि दो घंटे मोबाइल नहीं लेंगे तो उसकी पसंद का खिलौना दिलवाएंगे। 

पनिशमेंट -परिजनों को कहना है कि मोबाइल ज्यादा देर तक लोगो तो बाहर घुमाने नहीं ले जाएंगे। 

रीइन्फोर्सेमेंट - परिजनों को कहना है कि तुम अपनी पसंद का कोई काम करवाना चाहता हो तो मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करोगे। 

 

Edited By: Prateek Gupta