आगरा, जागरण संवाददाता। मेयर की सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित की गई है। नगर निगम, आगरा की मेयर की सीट तीसरी बार महिला के लिए आरक्षित की गई है। तीनों बार ही अनुसूचित जाति की महिला को मौका दिया गया है। सोमवार शाम को आरक्षण सूची जारी होते ही सामान्य और महिला आरक्षित सीट की संभावना पर दावेदारी कर रहे भाजपा, बसपा, कांग्रेस, सपा और आप के कार्यकर्ताओं के आरमानों पर पानी फिर गया। मेयर सीट के लिए आरक्षण सूची का सभी दलों के दावेदार इंतजार कर रहे थे। सोमवार शाम को सूची जारी होने के साथ ही राजनैतिक दलों ने दावेदारों की तलाश शुरू कर दी है।

अब तक चुने गए मेयर

1989 में पहली बार सामान्य सीट पर भाजपा के रमेशकांत लवानियां मेयर बने थे। उनके बाद दो बार महिला मेयर बनी, अब तीसरी बार महिला मेयर बनेंगी। उधर, मेयर की सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है। अभी तक नगर निगम में छह मेयर चुने गए हैं, ये सभी भाजपा पार्टी से मेयर बने हैं।

तीसरी बार अनुसूचित जाति महिला के लिए सीट

आरक्षित वर्ष,                     आरक्षण की स्थिति,             मेयर,                                       पार्टी

1989,                                     अनारक्षित,                 रमेशकांत लवानियां,                        भाजपा

1995,                              अनुसूचित जाति महिला,       बेबीरानी मौर्य,                                भाजपा

2000,                                   अनुसूचित जाति,            किशोरी लाल माहौर,                       भाजपा

2006,                                  अनुसूचित जाति महिला,    अंजुला सिंह माहौर,                        भाजपा

2012,                              अनुसूचित जाति,                      इंद्रजीत आर्य,                            भाजपा

2017,                                अनारक्षित,                           नवीन जैन,                                 भाजपा

2022,                                अनुसूचित जाति                        महिला

आधी आबादी ने दिखाया पूरा दम, आरक्षित सीट से ज्यादा पर जीती महिलाएं

आगरा नगर निगम के चुनाव और उसके बाद सदन में अपनी बात उठाने में महिला पार्षद आधी आबादी आगे रहीं। वर्ष 2017 के चुनाव में 33 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित थी, 40 महिला पार्षद चुनी गईं। नगर निगम चुनाव 2022 में महिलाओं के लिए 34 सीटें आरक्षित हैं, इस बार महिला पार्षदों की संख्या बढ़ सकती है। पिछले चुनाव में 100 पार्षदों में 40 महिलाएं चुनी गईं थी। अपने वार्ड में काम कराने से लेकर नगर निगम के सदन में प्रश्न करने और समस्याओं को उठाने में महिला पार्षद आगे रहीं। विकास कार्य भी महिला पार्षदों के वार्ड में अधिक हुए।

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मेरी सीट महिला के लिए आरक्षित नहीं थी, सामान्य सीट पर चुनाव लड़ा और नगर निगम में अपने क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता के साथ उठाया। विकास कार्य भी कराए। पार्षद सविता अग्रवाल वार्ड नंबर 81

वार्ड में नाली, पानी, सड़क, गंदगी। ये समस्याएं होती हैं, इन समस्याओं को महिलाएं ही महिला पार्षद को अच्छी तरह बता सकती हैं। इसलिए अपने क्षेत्र में ज्यादा काम करवाएं। पार्षद नेहा गुप्ता वार्ड नंबर 51

महिला पार्षद होने के बाद भी अपने क्षेत्र में करोड़ों के काम करवाए। सदन में अपनी बात प्रमुखता से रखी। इस बार सीट महिला के लिए आरक्षित नहीं है लेकिन चुनाव लडूंगी। पार्षद जरीना बेगम वार्ड नंबर 91

महिलाओं को और आगे आना चाहिए। नगर निगम में पहली बार 40 महिलाएं पार्षद बनी, महिलाओं के क्षेत्र में कार्य भी सबसे अधिक हुए हैं। यह अच्छा संकेत है। पार्षद वर्षा शर्मा वार्ड नंबर 60

महिलाएं अपने क्षेत्र की समस्याओं को अच्छी तरह से जानती हैं, इस बार नगर निगम में महिला पार्षदों के वार्ड में सबसे ज्यादा काम हुए हैं। सीट सुरक्षित होने से इस बार चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिलेगा। पार्षद राधिका अग्रवाल वार्ड नंबर 44

Edited By: Abhishek Saxena

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