आगरा, मनोज चौधरी। सलाखों के पीछे तन्हा जिंदगी को सुकून और शांति के कुछ पल देगा जेल का अपना रेडियो। कैदी अपनी फरमाइश बताएंगे और साथी कैदी उद्घोषक उसका नाम पुकार कर मनपसंद गीत का प्रसारण करेगा। जेल के अपने रेडियो का लगातार ट्रायल सफल होने के बाद स्वतंत्रता दिवस पर इसका विधिवत शुभारंभ किया गया।

जेल की ऊंची-ऊंची दीवार के बीच किसी न किसी जुर्म की सजा भुगत रहे कैदियों को वह सभी सहूलियतें मिले रही हैं जो जेल के मैन्युअल में शामिल है। इनके परिजन है, वह हफ्ता दस दिन में उनकी राजी खुशी लेने के लिए पहुंच रहे हैं और जिनका कोई नहीं है, वह दूसरे से दोस्ती करके वक्त की घड़ी गुजार रहे है। उनको जेल में सिर्फ एक ही पीड़ा हो रही है और वह बेचैनी। जो कभी उनको मायूस करती है तो कभी मन मस्तिष्क को तनाव घेर रहा है। इसी तनाव को कम करने के लिए मथुरा जेल ने अपना रेडियो शुरू किया है। इसके लिए जेल प्रशासन को कोई ज्यादा तामझाम भी एकत्र नहीं करने पड़े हैं। जेल की बैरकों में पहले से ही पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगा हुआ है। इसी सिस्टम से जेल के कैदियों को दिशा निर्देश भी दिए जा रहे हैं। अब इसे रेडियो में बदल दिया गया है। कंट्रोल रूम से जुड़े इस सिस्टम के जरिए कैदियों से सुबह उनकी मनपसंद गीतों की फरमाइश मांग ली जाती है और शाम को तीन से चार बजे तक उनकी मनपसंद गीत सुनाएं जाते हैं। उद्धोषक की भूमिका कैदी ही निभा रहे हैं। गीत भी इंटरनेट से अपलोड किए जा रहे हैं। जेल अधीक्षक शैलेंद्र मैत्रेय ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस पर गुरुवार को इसका शुभारंभ किया गया। गीतों के प्रसारण का समय भी बढ़ा दिया है।

भविष्य की ये है प्‍लानिंग

इंटरनेट से गीत अपलोड कर सुनाएं जाने तक जेल का रेडियो सीमित नहीं रहेगा। इसको किसी लोकल एफएम से कनेक्ट किए जाने की भी जेल प्रशासन की प्‍लानिंग है। आकाशवाणी, चैनल के एंकर भी बुलाएंगे जाएंगे। जो जेल के रेडियों पर रोमांटिक ढंग से कैदियों की मनपंसद के गीतों का प्रसारण करेंगे। इससे कैदी भी प्रसारण की कला सीख जाएंगे। तब समाचार, अध्यात्म, नाटक और मनोरंजक सामग्री का प्रसारण किया जाएगा।

आगरा जिला जेल का प्रयोग रहा सफल

आगरा की जिला जेल में पिछले माह रेडियो की शुरुआत की गई थी। यहां प्रयोग सफल रहा है और यह दूसरी जेलों के लिए नजीर बन रहा है। इस रेडियो में जॉकी की भूमिका में डीइआइ में शोध छात्रा का हत्‍यारोपित कमान संभाले है। वह रेडियो पर प्रसारित होने वाले प्राेग्राम तय करता है। उसके साथ एक अन्‍य कैदी भी जिम्‍मेदारी संभाल रहा है। यहां कैदियों की फरमाइशें ली जाती हैं, उसके बाद गानों और कैदियों द्वारा रचित कविताओं का गायन किया जा रहा है।

 

Posted By: Prateek Gupta