आगरा, जागरण संवाददाता। आगरा के आर. मधुराज हास्पिटल में हुई आगजनी में तीन लोगों की मौत हुई थी। अवैध अस्पतालों की मंडी यमुनापार के कुछ उदाहरण हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मुट्ठी गर्म करने पर अस्पतालों की सील खुल जाती है।

अस्पताल में आग की घटना से नहीं लिया सबक

विभागीय आंकड़ों के आधार पर सात साल में 51 अस्पताल सील हुए हैं। एक से छह माह तक बंद रहने के बाद फिर से अस्पतालों की सील खुल गई। कई अस्पताल तो ऐसे भी हैं जो दो बार सील हुए हैं। मानक पूरे न होने के बाद यह खुल गए। अस्पताल खुलने से पूर्व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सत्यापन में सत्यापन में खानापूर्ति की।

ये पांच उदाहरण हैं यमुनापार के

फिरोजाबाद रोड पर सितंबर 2018 में श्रीएम नर्सिंग होम खुला था। फरवरी 2019 में मरीज की मौत पर हंगामा हुआ। स्वास्थ्य विभाग की टीम मार्च के पहले सप्ताह में अस्पताल को सील कर दिया। अक्टूबर 2019 में श्रीएम अस्पताल की सील फिर से खुल गई। नवंबर 2019 में महिला मरीज की मौत हो गई। जनवरी 2020 में अस्पताल को सील कर दिया गया। मार्च 2020 में सील खुल गई। वर्तमान में यह अस्पताल मौके पर नहीं है।

फिरोजाबाद रोड स्थित मंडी समिति के पास सरस्वती अस्पताल है। यह अस्पताल पांच साल पूर्व खुला था। वर्ष 2021 में महिला मरीज की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसे सील कर दिया। चार माह पूर्व अस्पताल की सील खुल गई। इस अस्पताल में भूतल भी है। गुरुवार शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भूतल को सील कर दिया। आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।

- रायल अस्पताल, ट्रांस यमुना कालोनी फेज-दो। छह माह पूर्व महिला के आपरेशन का वीडियो प्रसारित हो गया था। शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इसे सील कर दिया। 22 सितंबर को इस अस्पताल की सील खुल गई। इस अस्पताल में आग से बचाव के इंतजाम नहीं हैं।

- लोकहितम अस्पताल, कालिंदी विहार सौ फुटा रोड। इसके संचालक उदयवीर सिंह व हिमांशु चाहर थे। वर्ष 2018 में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इसे सील कर दिया। इसी नाम से अस्पताल ट्रांस यमुना कालोनी फेज-दो में खुल गया। इसी बिल्डिंग में हरे कृष्णा अस्पताल भी संचालित था। यहां पर इसे फिर से सील कर दिया गया। छह माह पूर्व संचालक बदल गए और यह डा. सौरभ कुमार हो गए। यह अस्पताल फिर कालिंदी विहार सौ फुटा रोड की पुरानी बिल्डिंग में खुल गया है।

- आराध्या अस्पताल, मंडी समिति फिरोजाबाद रोड। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने वर्ष 2018 में इस अस्पताल को सील कर दिया। छह माह के बाद अस्पताल की बिल्डिंग बिक गई। इसे संचालक रमाकांत सिकरवार हो गए। इस अस्पताल में 16 बेड हैं। भूतल भी है। आग से बचाव के इंतजाम नहीं हैं।

अस्पतालों की सील खुलने वालों की हो जांच

शिकायतकर्ता गंभीर सिंह ने बताया कि सील खुलने की प्रक्रिया आसान नहीं है। पहले सत्यापन होना चाहिए जो कमियां रही हैं। उन्हें दूर किया जाना चाहिए। डाक्टरों की सूची और बेड की संख्या सहित अन्य का भी सत्यापन होता है लेकिन विभागीय टीम दस्तावेजों की जांच कर सील खुलवा देती है। शिकायतकर्ता विश्वास कुमार ने बताया कि जिन अस्पतालों की सील खुली है। उनकी गोपनीय जांच होनी चाहिए। इससे पूरा खेल खुलकर सामने आ जाएगा।

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लोकहितम अस्पताल के स्थल में बदलाव हुआ था। सभी दस्तावेज पूरे हैं। फायर सिस्टम नहीं है। - डा. सौरभ कुमार, संचालक लोकहितम अस्पताल

अस्पताल में पूर्व में सील लगी थी। अब यह मेरे द्वारा संचालित किया जा रहा है। मानकों का पालन हो रहा है। - रमाकांत सिकरवार, संचालक आराध्या अस्पताल

सीएमओ कार्यालय में पंजीकरण है। मानक पूरे हैं। एक मामले में इसे पूर्व में सील किया गया था। - राहुल शर्मा, संचालक रायल अस्पताल 

Edited By: Abhishek Saxena

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