आगरा, जागरण संवाददाता। अगर मेरा बेटा गुनाहगार है तो उसे नहीं बचाऊंगा, पैरवी भी नहीं करूंगा। चौहरे हत्याकांड के पर्दाफाश के बाद पुलिस से बेटे की करतूत जानने के बाद आरोपित संतोष के पिता का छूटते ही यही कहना था। पिता का कहना है कि बेटे के खिलाफ पुलिस के पास साक्ष्य हैं तो वह उसे रत्ती भर भी बचाने का प्रयास नहीं करेंगे।

कोतवाली के कूचा साधूराम में चौबेजी वाली गली में 21 जुलाई को हुए सामूहिक हत्याकांड का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। रेखा उसके तीनों बच्चों वंश, पारस व माही की हत्या रिश्ते के भाई संतोष राठौर ने साथियों अंशुल और बीरू के साथ मिलकर की थी। तीनों लोगों ने रेखा और तीनों बच्चों का चाकू से गला काट दिया था। बेटे की करतूत से पिता बादाम सिंह और उनका पूरा परिवार हतप्रभ और शर्मिंदा है। रेखा के परिवार से पिता बादाम सिंह का कहना था कि वह उनकी भी बेटी थी। इसलिए बेटे ने यदि सामूहिक हत्याकांड काे अंजाम दिया है तो वह उसे बचाने की बिल्कुल कोशिश नहीं करेंगे।

धनतेरस पर लेकर आया था रेखा की एक्टिवा

एक्टिवा स्कूटर को लेकर भी संतोष ने स्वजन से झूठ बोला था। उन्हें बताया था कि किस्तों पर स्कूटर लिया है। उस समय स्वजन को नहीं पता था कि वह इसे रेखा से लेकर आया है। पुलिस द्वारा हत्याकांड के पर्दाफाश करने पर पिता और परिवार के लोगों को पता चला कि एक्टिवा रेखा से लेकर आया था।

लालच और झूठ बोलने की आदत बन गई नासूर

पिता बादाम सिंह ने बताया संतोष की झूठ बोलने की आदत और लालच उसके लिए नासूर बन गई। वह दस साल पहले पिता से अलग हो गया था। पिता शराब की बोतलों की ट्रेडिग का काम करते थे। उन्होंने अपना कारोबार उसे साैंप दिया। जिसे संतोष ने कुछ साल में ही डुबा दिया। छह साल पहले उसने परचून की दुकान खोली। जिसे पत्नी चला रही थी। पिता ने बताया कि करीब एक साल से संतोष उनसे बात-बात पर झूठ बोलने लगा था। उसकी इस अादत से परिवार के अन्य लोग भी परेशान थे।

हत्यारोपित की पत्नी बोली मेरे लिए कोरोना में मर जाते तो अच्छा होता

तुमने उनके साथ ऐसा किया है, तुम्हारे बच्चे के साथ भी कोई कर देगा तो क्या होगा। हमारे लिए उसी दिन मर जाते तो अच्छा था। पति द्वारा रेखा और चार बच्चों की हत्या की जानकारी होने पर उसकी पत्नी का परिवार के लोगों से यह कहना था। एक साल पहले संतोष कोरोना से संक्रमित हो गया था। वह दाे सप्ताह तक एसएन मेडिकल कालेज में भर्ती रहा था। इस दाैरान पत्नी कोरोना संक्रमित होने की चिंता किए बिना एसएन में उसकी सेवा के लिए डटी रही थी। 

Edited By: Tanu Gupta