आगरा, जागरण संवाददाता। लंपी स्किन डिसीज (एलएसडी) वायरस के सामने टीकाकरण बेअसर साबित हो रहा है। फतेहपुरसीकरी में दर्जनों गोवंश के टीके लगाए गए, उनमें भी लंपी वायरस के लक्षण पाए जा रहे हैं। पशुपालकों के सामने यह भी बड़ी चुनौती है कि लंपी वायरस से पीड़ित बेसहारा गोवंश से अपने गोवंश को कैसे बचाना जाए। बेसहारा गोवंश इधर से उधर घूम रहा है। जिससे लंपी वायरस उसके इर्द गिर्द घूम रहा है। जिससे पशु पालकों का गोवंश भी पीड़ित हो रहा है। पशु पालन विभाग लंपी वायरस से पीड़ित बेसहारा गोवंश को आरक्षित गोशालाओं में नहीं रख रहा है। अब तक आगरा में तीन गायाें की मौत इस वायरस से हो चुकी है।

लंपी वायरस से पीड़ित गोवंश के लिए पशुपालन विभाग ने तीन गोशालाओं को आरक्षित किया था। इन गोशालाओं में लंपी वायरस से पीड़ित गोवंश को रखना था। जिनमें आज तक एक भी गोवंश को नहीं रखा गया है। बेसहारा गोवंश ऐसे ही घूम रहा है। जिसे पकड़कर आरक्षित गोशालाओं में रखना चाहिए था, वो काम नहीं किया जा रहा है।

बेशक पशुपालन विभाग लगातार टीकाकरण करने में जुटा है। पशुपालकों के मुताबिक टीका बेअसर साबित हो रहा है। जिन गोवंश में टीका लगाया गया है, उनमें लंपी वायरस के लक्षण पाए जा रहे हैं। इससे पशुपालकों में भय व्याप्त है। उनके सामने सबसे बड़ा चैलेंज यह है कि पीड़ित बेसहारा गोवंश से गोवंश को कैसे बचाया जाए।

लंपी वायरस का कोई ठोस इलाज नहीं है। इससे केवल सावधानी से ही बचाव किया जा सकता है। टीकाकरण लगातार कराया जा रहा है।

विजयवीर चंद्रयाल

प्रभारी मुख्य पशुचिकित्साधिकारी 

Edited By: Prateek Gupta