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डीजे की तेज आवाज बन सकती है जानलेवा, ब्रुगाडा सिंड्रोम और LQTS पीड़ितों के लिए बड़ा खतरा

By Ajay Dubey Edited By: Prateek Gupta
Published: Mon, 28 Sep 2026 01:28 PM (IST)

डीजे की तेज आवाज ब्रुगाडा सिंड्रोम और एलक्यूटीएस टाइप 2 से पीड़ित लोगों के लिए जानलेवा हो सकती है, जिससे ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

जागरण संवाददाता, आगरा। म्यूजिक सिस्टम (डिस्क जाॅकी, डीजे) की तेज आवाज और धमक से मेरठ में प्रसूता और बलरामपुर में कक्षा दो की छात्रा की मौत के बाद लोग परेशान हैं। जन्मदिन की पार्टी से लेकर शादी समारोह और धार्मिक आयोजनों में तेज आवाज में म्यूजिक सिस्टम बजने से लोगों की नींद खराब करने के साथ जानलेवा भी हो सकता है।

हृदय की अनुवांशिक बीमारी ब्रुगाडा सिंड्रोम और लांग क्यूटी सिंड्रोम टाइप 2 (एलक्यूटीएस) से पीड़ित मरीजों की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो सकती है। यद्यपि इन दोनों सिंड्रोम से पीड़ित मरीजों की संख्या बहुत कम है और अधिकांश मरीजों में लक्षण भी नहीं आते हैं।

डीजे की आवाज 100 डेसिबल से अधिक होती है और 120 डेसिबल से ज्यादा की आवाज से कान के पर्दे फटने और दिल की धड़कन तेज होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में भी जिन लोगों को बुग्राडा सिंड्रोम है और एलक्यूटीएस टाइप टू है तेज आवाज से उनकी धड़कन अनियंत्रित हो जाती है और कार्डियक अरेस्ट से मौत तक हो सकती है।

ब्रुगाडा सिंड्रोम

  • 70 प्रतिशत मामलों में कोई लक्षण नहीं आते हैं
  • हृदय के सोडियम चैनल जीन में म्यूटेशन के कारण बीमारी होती है
  • 10 हजार में से पांच लोगों को यह अनुवांशिक बीमारी होती है
  • 30 से 50 वर्ष की आयु के लोगों में ज्यादा होती है
  • अचानक बेहोशी, दौरे पड़ना, चक्कर आना ब्रुगाडा सिंड्रोम के लक्षण हो सकते हैं

एलक्यूटीएस 2

  • 80 प्रतिशत मामलों में कोई लक्षण नहीं आते हैं
  • जीन में म्यूटेशन के कारण यह सिंड्रोम होता है
  • पांच हजार में से एक व्यक्ति को यह समस्या हो सकती है
  • 10 से 30 वर्ष की आयु में यह समस्या ज्यादा मिलती है
  • अचानक चक्कर, बेहोश होना, घबराहट, तेज धड़कन महसूस होना, दौरे एलीक्यूटी 2 के लक्षण हो सकते हैं

ये हैं मानक

  • 50 डेसिबल तक की आवाज से कोई नुकसान नहीं होता है
  • 60 से 80 डेसिबल से अधिक की आवाज सप्ताह में 40 घंटे तक ही सुरक्षित
  • 90 डेसिबल की आवाज में चार घंटे से ज्यादा रहना घातक
  • 100 डेसिबल की आवाज में 20 मिनट से ज्यादा रहना घातक

 

गर्भावस्था, प्रसव के साथ और प्रसूता को कोई अनुवांशिक बीमारी नहीं है तो तेज आवाज से कार्डियक अरेस्ट का खतरा नहीं होता है। मगर, ज्यादा देर तक तेज आवाज में नहीं रहना चाहिए। गर्भवती को 30 से 50 डेसिबल की आवाज में संगीत सुनना चाहिए।
डा. रिचा सिंह, स्त्री रोग विशेषज्ञ एसएन मेडिकल कालेज एवं अस्पताल


ब्रुगाडा सिंड्रोम से पीड़ित मरीजों में तेज आवाज और तेज बुखार में दिल की धड़कन अनियंत्रित होने से कार्डियक अरेस्ट पड़ सकता है। इसी तरह से एलक्यूटीएस टाइप टू में तेज आवाज और अचानक से किसी बात से सदमा लगने से कार्डियक अरेस्ट की आशंका रहती है। सामान्य लोगों में तेज आवाज से कोई खतरा नहीं होता है।
डा. सौरभ नागर, हृदय रोग विशेषज्ञ एसएन मेडिकल कालेज एवं अस्पताल