यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 10, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हद हुई पार, आगरा में 72 घंटे से लगातार खतरनाक हवा, नियंत्रण को कोई एक्शन नहीं
ग्रेप के अनुसार 48 घंटे तक वायु गुणवत्ता में सुधार न होने पर उठाए जाने थे कदम। संबंधित विभागों को ...और पढ़ें

आगरा, जागरण संवाददाता। ताजनगरी में 72 घंटे से अधिक समय से वायु गुणवत्ता खतरनाक स्थिति में बनी हुई है। सरकारी विभागों की अकर्मण्यता का आलम यह है कि उन्होंने वायु प्रदूषण कम करने को अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया है। न तो नगर निगम की सीमा से बाहर ट्रकों को रोका गया है और न ही निर्माण कार्यों पर पाबंदी लगाई गई है, जबकि ग्रेडेड रिस्पोंस एक्शन प्लान (ग्रेप) के अनुसार 48 घंटे तक वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं होने पर कई कदम उठाए जाने थे।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों पर आगरा को नान-अटेनमेंट सिटी में शामिल किया गया है। यहां वायु प्रदूषण बढ़ने पर वायु गुणवत्ता में सुधार करने के लिए उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने पिछले वर्ष ग्रेप लागू किया था। यूपीपीसीबी द्वारा जिम्मेदार विभागों को तीन बार दिशा-निर्देश जारी करने के बावजूद उन पर कोई असर नहीं हुआ। ग्रेप के अनुसार कार्रवाई करने की जिम्मेदारी नगर निगम, आगरा विकास प्राधिकरण, यातायात पुलिस, आवास विकास परिषद, संभागीय परिवहन कार्यालय, राज्य सेतु निगम, लोक निर्माण विभाग, जल निगम, आगरा स्मार्ट सिटी लिमिटेड, कृषि विभाग और उप्र मेट्रो रेल कारपोरेशन की है। न तो इन्होंने किसी निर्माण को राेका, न ही वहां धूल उड़ने से रोकने को समुचित इंतजाम किए।
यूपीपीसीबी के प्रभारी क्षेत्रीय अधिकारी डा. विश्वनाथ शर्मा ने बताया कि किसी भी विभाग ने वायु प्रदूषण बढ़ने पर ग्रेप के अनुसार कार्रवाई करते हुए अपनी रिपोर्ट नहीं भेजी है। अब नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
कागजों तक सीमित हैं सभी प्लान
पर्यावरणविद् डा. शरद गुप्ता का कहना है कि आगरा को प्रदूषण से निजात दिलाने को समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा आदेश जारी किए गए हैं। कई बार एक्शन प्लान बनाए गए हैं, लेकिन वो सभी कागजों तक सीमित हैं। जिम्मेदार विभाग एक्शन प्लान पर अगर 25 फीसद भी काम कर लें तो वायु प्रदूषण कम हो जाएगा।
