आगरा, जागरण संवाददाता (अली अब्बास)। हालात ने उन्हें बिना किसी की खता के सजा काटने पर मजबूर कर दिया है। मां के जुर्म की सजा उन्हें मिल रही है। जेल की चहारदीवारी के पीछे रहने को मजबूर हैं। मगर, इस चहारदीवारी के पीछे भी कुछ ऐसा है, जो इन बच्चों को हर पल अपनी ओर खींचता है। यह आकर्षित करने वाला सामान कुछ और नहीं बल्कि जिला जेल का एक कमरा है। जिसमें बच्चों के मनपसंद खिलौने हैं। इन खिलौनों के साथ वह खेल-खेल में सीखते हैं।

उनकी इस जिज्ञासा को शिक्षक भी शांत करती हैं। जो उन्हें पढ़ा रही हैं, जिससे कि वह छह वर्ष की उम्र के बाद बाहर आएं तो स्कूल में प्रवेश ले सकें। अपनी आगे की पढाई कर भविष्य को बेहतर बना सकें।

जिला जेल में हैं 140 से अधिक महिला बंदी

जिला जेल में वर्तमान में 140 से अधिक महिला बंदी हैं। जिनके बीच छह बच्चे हैं। दो बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने इस चहारदीवारी के अंदर ही जन्म लिया है। एक बच्ची तो दो महीने पहले ही यहां जन्मी है। बच्ची को छोड़ कर यहां रहने वाले सभी बच्चे पढ़ाई भी कर रहे हैं। नई जेल नियमावली में महिला बंदियों के साथ रहने वाले वाले बच्चों के भविष्य पर भी काफी ध्यान दिया गया है। जेल में बच्चों के लिए किड्स कार्नर बनाने की कहा गया है। जिससे कि बच्चों बैरक से इतर माहौल देकर उनका स्वाभाविक विकास किया जा सके।

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पांच वर्ष पहले ही बना था किड्स कार्नर

आगरा जिला जेल में पांच वर्ष पहले ही बच्चों के लिए किड्स कार्नर बनाया दिया गया था। जिससे कि बच्चे वहां पर रहकर अपना बेहतर समय बिता सकें। इसके साथ ही एक शिक्षिका की व्यवस्था की गई थी। बेसिक शिक्षा विभाग से एक शिक्षिका इन बच्चों के लिए नियुक्त है। जो सुबह साढ़े सात बजे से दोपहर एक बजे की कक्षा लगती हैं। जिसमें बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया जाता है।

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41 बंदियों की भी लगती है पाठशाला

जिला जेल में 18 से 21 वर्ष की आयु के 41 बंदियों में भी पढ़ने का शौक

विभिन्न अपराधों में बंद है ये युवा आरोपितों को जेल अभ्यस्त अपराधियों से अलग बैरक में रखा है। जिससे कि वह आदतनी अपराधी संगत में आने से बच सकें। इन युवा आरोपितों के लिए भी बेसिक शिक्षा विभाग से शिक्षक को नियुक्त किया गया है। शुरुआत में कुछ ही युवा बंदियों ने पढ़ाई में दिलचस्पी दिखाई। बाद में बंदी साथियों के बेहतर परिणाम में देखकर ये युवा बंदी भी शिक्षा की ओर अग्रसर हुए। वर्तमान में 41 बंदी नियमित क्लास ले रहे हैं।

महिला बैरक में रहने वाले बच्चों के लिए किड्स कॉर्नर बनाया गया है। जिससे कि बच्चे वहां पर खेलते के साथ ही पढ़ाई भी कर सकें। - पीडीर सलौनिया जिला जेल अक्षीक्षक 

Edited By: Abhishek Saxena

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