आगरा, जागरण संवाददाता। ढाई वर्ष के मासूम की बरामदगी को आइजी रेंज नचिकेता झा और एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने चुनौती के रूप में लिया। मासूम की सकुशल बरामदगी के लिए उन्होंने थाना पुलिस के अलावा एसओजी, क्रिमिनल इंटेलीजेंस विंग और सर्विलांस टीम को लगाया था। आजमपाड़ा इलाके में सादे कपड़ों में 80 पुलिसकर्मी 12 घंटे तक गलियों में घूमते रहे। सीसीटीवी फुटेज की सुगबुगाहट से मिले सुराग की मदद से पुलिस अपहर्ता मौसिम तक पहुंच गई। आधी रात को टीम ने मासूम को सकुशल बरामद कर लिया।

सीसीटीवी देखकर अपहर्ता के रूट का लगा पता

एससपी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि पुलिस ने सबसे पहले सीसीटीवी कैमरों की मदद से अपहर्ता के रूट का पता किया। जिस जगह से बच्चा उठाया गया, वह पृथ्वीनाथ फाटक मुख्य सड़क से करीब एक किलोमीटर दूर था। बस्ती में कोई बाहरी व्यक्ति आकर बच्चे को अगवा करने का दुस्साहस नहीं कर सकता था। पुलिस मान रही थी कि अपहर्ता स्थानीय है। यदि बाहर का रहने वाला है तो उसका यहां आना-जाना रहा होगा। जिसके बाद पुलिस ने पूरा ध्यान आजमपाड़ा, दौरेठा और उससे जुड़ी आसपास की बस्तियों पर केंद्रित किया।

सादा कपड़ों में तैनात रहे पुलिसकर्मी

मासूम के स्वजन के अलावा 80 पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में इन बस्तियों में बुधवार की सुबह दस बजे से सक्रिय कर दिए। सर्विलांस टीम को अपहर्ता का रूट पता लगाने और सीसीटीवी कैमरो की फुटेज उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई। आरोपित के स्पष्ट सीसीटीवी फुटेज पुलिस को उपलब्ध कराए गए। जिसे आजमपाड़ा में सादे कपड़ों में सक्रिय पुलिसकर्मियों ने गली-गली में युवकों के पास तक पहुंचा दिया।

मौसिम को पकड़कर हुई पूछताछ

पुलिस टीम की यह रणनीति काम आई। फुटेज को देखकर बस्ती के लोगों में सुगबुगाहट शुरू हो गई। फुटेज से मिलते संदिग्ध चेहरों के बारे में पुलिस को सूचनाएं मिलने लगीं। जिन पर पुलिस स्वजन के साथ जाकर तस्दीक करती रही। देर रात पुलिस और जय प्रकाश को आजमपाडा कुछ युवकों ने सूचना दी। उन्होंने बताया कि वृंदावन निवासी मौसिम अपने मामा के यहां छह महीने से रह रहा है। मंगलवार की शाम जिस समय बच्चा अगवा हुआ, वह भी गायब था। अपहर्ता से उसका चेहरा काफी मिलता है। वह कुछ देर पहले ही कहीं से आया है। स्वजन और पुलिस आजमपाड़ा में उक्त मकान में पहुंचे। उन्होंने मौसिम को पकड़ लिया। पूछताछ की तो उसने बच्चे के अपहरण की बात कबूल कर ली। पुलिस ने मयंक को सकुशल बरामद कर लिया।

चाचा को देखते ही लिपट गया मयंक

मासूम मयंक का माता-पिता के बिना रोकर बुरा हाल था। वह उनके पास जाने की जिद करते हुए सो गया था। आधी रात को मयंक चाचा राहुल पुलिस के साथ पहुंचे। राहुल ने उसे जगाया। चाचा को सामने देख मयंक उनसे बुरी तरह से लिपट गया। उनकी गोद से नहीं उतर रहा था।

अन्न त्याग बेटे के मिलने को प्रार्थना करती रही मां

मां मिथिलेश ने मंगलवार की शाम से ही अन्न त्याग दिया था। वह मंदिर के सामने बैंठ गईं। पुत्र मयंक के सकुशल बरामदगी की प्रार्थना करती रहीं। दादी कांता देवी भी उनके प्रार्थना पर बैठी रहीं। मिथिलेश ने बताया कि उन्होंने प्रण किया था कि जब तक पुत्र सकुशल नहीं मिल जाता, वह प्रार्थना बंद नहीं करेंगी। ईश्वर ने उनकी सुन ली।

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बच्चे के कपडे बदल गले में डाल दी थी ताबीज

अपहर्ता ने बच्चे को ले जाने के बाद उसके कपड़े बदल दिए थे। माता-पिता ने उसे लाकेट व अन्य चीजें पहना रखी थीं। आरोपितों ने उसकी यह सारी चीजें निकाल दी थीं। उसके गले में ताबीज पहनाने के बाद काला टीका लगा दिया था।जिससे कि उसका हुलिया देखकर कोई शक न करे। 

Edited By: Abhishek Saxena

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