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    Sloth Bear: भालू संरक्षण गृह आगरा में 23 सालों से नहीं जन्मा एक भी भालू, कलंदरों की करतूत, करते थे नसबंदी

    By Prabhjot KaurEdited By: Abhishek Saxena
    Updated: Tue, 29 Nov 2022 03:00 AM (IST)

    Sloth Bear आगरा के कीठम भालू संरक्षण गृह में इन दिनों 109 भालू रह रहे हैं। 51 नर और 58 हैं मादा। कलंदर निकाल देते थे अंडकोष और कर देते थे नसबंदी। इन भालुओं को देश के कोने-कोने से रेस्क्यू किया गया था।

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    Sloth Bear: भालू संरक्षण गृह आगरा में 23 सालों से नहीं जन्मा एक भी भालू

    आगरा, जागरण संवाददाता, (प्रभजोत कौर)। प्रदेश के इकलौते भालू संरक्षण गृह में पिछले 23 सालों से भालू की बिरादरी में एक भी नन्हा मेहमान नहीं आया है।जबकि यहां 51 नर और 58 मादा हैं। इसकी वजह है कलंदर। कलंदरों से मुक्त कराए गए इन भालुओं की नसबंदी कलंदरों ने ही कर दी थी। मादा भालुओं के अंडकोष निकाल दिए जाते हैं जिससे वे प्रजनन काल में उत्तेजित न हों।

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    भालू संरक्षण गृह में हो रही देखभाल

    कीठम स्थित भालू संरक्षण गृह स्लाथ प्रजाति के भालूओं का सबसे बड़ा संरक्षण और पुनर्वास केंद्र है, जिसकी स्थापना 1999 में उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग से वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा की गई थी। वाइल्डलाइफ एसओएस ने 628 से अधिक नाच दिखाने वाले भालुओं को बचाया और उनका पुनर्वास किया है। जिन्हें वाइल्ड लाइफ एसओएस के आगरा, भोपाल, पश्चिम बंगाल और बंगलुरू के केंद्रों पर रखा गया है। भारत के जंगलों में छह से 11 हजार स्लाथ भालू ही बचे हैं। इसलिए इनके संरक्षण के लिए यह केंद्र स्थापित किए गए। वर्तमान में यहां नर और मादा मिलाकर 109 भालू हैं। यह सभी भालू कलंदरों से मुक्त कराए गए हैं।

    कलंदर जंगलों से चुराकर लाते थे भालू

    कलंदर इन भालुओं को जंगलों से चुराकर लाते थे। भालू प्रजनन काल में ज्यादा उत्तेजित हो जाते हैं, फिर उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से कलंदर बचपन में ही मादा भालू के अंडकोष निकाल देते हैं और नर भालुओं की नसबंदी करा देते हैं। वाइल्ड लाइफ एसओएस के मीडिया प्रभारी श्रेष्ठ सिंह का कहना है कि यह संरक्षण गृह है प्रजनन केंद्र नहीं, यहां मादा और नर भालू को अलग-अलग रखा जाता है। प्रजनन केंद्र के लिए सरकार से अनुमति चाहिए होती हैं, नियम होते हैं, प्रक्रिया होती है। इस बारे में अभी विचार नहीं किया गया है। चिकित्सक डा. बैजू ने बताया कि यहां कुछ भालू एेसे भी हैं, जिन्हें बचपन में रेस्क्यू कर लिया गया था। इस वजह से उनकी नसबंदी नहीं हो पाई थी। प्रजनन काल में एेसे भालुओं को अलग रखा जाता है।

    स्लाथ भालू की विशेषता

    स्लाथ भालू दुनिया भर में पाई जाने वाली आठ भालू की प्रजातियों में से एक है। उन्हें लंबे, झबरा गहरे भूरे या काले बाल, छाती पर सफेद ‘वी’ की आकृति और चार इंच लंबे नाखून से पहचाना जा सकता है, जिनका उपयोग वह टीले से दीमक और चींटियों को बाहर निकालने के लिए करते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में वे तटीय क्षेत्र, पश्चिमी घाट और हिमालय बेस तक फैले हुए हैं।

    आज, भारत पूरे विश्व की 90 प्रतिशथ स्लाथ भालुओं की आबादी का घर है। पिछले तीन दशकों में घटते जंगल, अवैध शिकार और मानव-भालू संघर्ष में वृद्धि के कारण उनकी आबादी में 50 प्रतिशत तक की गिरावट आई ङै। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में इस प्रजाति को अनुसूची के तहत सूचीबद्ध किया गया है, जो इन्हें बाघ, गैंडे और हाथियों के समान सुरक्षा प्रदान करता है।