आगरा, अम्बुज उपाध्याय। ब्रज के कण-कण में राधा-कृष्ण का वास है और हर क्षेत्र लीलाओं, विशेषताओं से जुड़ा है। मुरली मनोहर ने यहां की रज को अपनी क्रीड़ा स्थली बनाया तो कदंब वृक्ष की डाल पर बैठ खूब बांसुरी बजाई है। मान्यता है कि जहां कदंब होता है वहां श्रीकृष्ण रोज बांसुरी बजाते हैं। ऐसी ही प्राचीन मूर्तियां शमसाबाद रोड स्थित राजेश्वर मंदिर में विराजमान हैं, जिनके ऊपर विशाल कदंब वृक्ष है। श्रद्धालुओं के अनुसार कदंब पुष्प राधा-कृष्ण का स्वयं अभिषेक करते हैं। भगवान कृष्ण और राधारानी की यहां दशकों पुरानी मोहक प्रतिमाएं हैं।

मंदिर का इतिहास 

शमसाबाद रोड पर 852 वर्ष पुराना प्राचीन राजेश्वर महादेव मंदिर है। मान्यता है कि एक साहूकार शिवलिंग लेकर राजाखेड़ा जा रहे थे। उन्होंने क्षेत्र में रात्रि विश्राम किया और जब सुबह रवाना होने के लिए बैलगाड़ी में सवार हुए तो शिवलिंग लुढक गया। इसके बाद कई लोगों ने इसे उठाने का प्रयास किया, लेकिन शिवलिंग हिला नहीं। विधिवत पूजन कर यहां मंदिर की स्थापना की गई। मंदिर परिसर में ही कई दिव्य और दशकों पुरानी मूर्ति हैं, जिसमें राधा-कृष्ण भी हैं। इनके ऊपर विशाल कदंब वृक्ष है, जिसको लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। देवी प्रसाद तिवारी ने इसका निर्माण कराया था।

प्राचीन राजेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट के उप सचिव ब्रजपाल सिंह तोमर पप्पू ठाकुर ने बताया कि मंदिर में सेवा करने वाले और क्षेत्रीय लोगों को कई बार यहां श्रीकृष्ण की छाया महसूस हुई है। कदंब पर दिव्य शक्ति होने का एहसास होता है। त्योहार और उत्सवों पर यहां की रौनक अलग होती है। तिवारी परिवार की चौथी और पुजारी परिवार की तीसरी पीढ़ी यहां सेवा कर रही है।

सेवा के लिए पीढिय़ों से जुटा परिवार

मंदिर निर्माण कराने वाले तिवारी परिवार की चौथी पीढ़ी के चंद्रशेखर तिवारी मंदिर की देखरेख करते हैं, उनका सहयोग विनोद तिवारी करते हैं। वहीं सेवा के लिए नियुक्त किए गए पुजारी परिवार की तीसरी पीढ़ी के रूपेश उपाध्याय सेवा कर रहे हैं। मंदिर के महंत कालीचरण गोस्वामी है।

जन्माष्टमी पर भव्य होता है आयोजन, संक्रमण ने डाली बाधा

मंदिर परिसर में जन्माष्टमी पर भव्य सजावट होती है। इसके साथ ही भजन संध्या और दूसरे आयोजन होते हैं। श्रद्धालुओं की कतार लगी रहती है। इस बार कोरोना संक्रमण काल ने सब कुछ प्रभावित कर दिया है। सजावट तो भक्तों ने भव्य की है, लेकिन उससे निहारने वालों की संख्या सीमित ही रहने वाली है। 

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