आगरा, सत्येंद्र दुबे। मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना ही नहीं सभी तीर्थों का भांजा कहे जाने वाले बटेश्वर से कृष्ण कन्हैया का गहरा नाता रहा है। यमुना नदी के तट पर बसे इस तीर्थ स्थल की महाभारत काल में भी मुख्य भूमिका रही है। कुंती व कर्ण ने यहां प्रवास किया था, वहीं पांडवों ने अज्ञातवास का कुछ समय यहां बिताया था। श्रीकृष्ण के पितामह ने अपनी राजधानी भी शौरीपुर को बनाया था।

बटेश्वर मंदिर के राकेश वाजपेयी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के पूर्वज राजा सूरसैन की राजधानी रहा सैनपुर अब शौरीपुर के नाम से जाना जाता है। यह तीर्थ ब्रज मंडल का भाग है। 84 कोस की परिक्रमा में इसका समावेश है। यह बात ओर है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म यहां नहीं हुआ और ना ही बचपन बीता, फिर भी उनका नाम लिए बगैर बटेश्वर व शौरीपुर का इतिहास अधूरा है। कुछ किंवदंतियों पर गौर करें तो महाभारत काल के दौरान जब पांडवों को अज्ञातवास हुआ तो कृष्ण ने उन्हें शौरीपुर रहने की सलाह दी थी। यही नहीं कृष्ण की खोज में कंस बटेश्वर शौरीपुर तक आया था। कृष्ण ने यहां रहकर अपनी बाल लीला भी की थी।

...तो फिर शौरीपुर में जन्म लेते कान्हा

देवकी की विदाई के समय अगर आकाशवाणी नहीं हुई होती तो भगवान श्रीकृष्ण शायद शौरीपुर में जन्म लेते, जो उनके पितामह की राजधानी थी। वासुदेव जब मथुरा से शौरीपुर देवकी की विदा करा कर लौट रहे थे, उस समय अचानक आसमान ने भविष्यवाणी हुई थी, जिसे सुन कर कंस पहले तो अचरज में पड़ गया। भय के कारण बहन देवकी व बहनोई वासुदेव को मथुरा की कारागार में डाल दिया। अगर ऐसा नहीं होता तो शायद भगवान कृष्ण का जन्म शौरीपुर में ही होता।

घर-घर होगा उत्सव

बुधवार को कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर घर-घर सजावट होगी। ङ्क्षहडोला सजाया जाएगा। आधी रात को भगवान के जन्म लेते ही उत्सव का माहौल हो जाएगा। इस बार मंदिरों में आम आदमी पर्व नहीं मना पाएगा।  

Edited By: Tanu Gupta