आगरा, आदर्श नंदन गुप्‍त। ताजनगरी के नाम कई खासियतें जुड़ी हैं, इनमें एक विशेषता है यहां का सेवाभावी समाज। कई लोगों का मानना है कि जितने सेवा कार्य आगरा में किए जा रहे हैं, उतने किसी शहर में नही हो रहे हैं। इसी प्रकार के एक बड़े सेवा कार्य का केंद्र है हरदयाल विकलांग केंद्र।

जीवन का दारुण दुख सहते हुए दिव्यांग जन यहां घिसटते हुए आते हैं और जाते हैं अपने पैरों पर चलते हुए। तब उनके चेहरे पर अजीब सी खुशी होती है। लगता है कि उन्हें सब कुछ मिल गया। दिव्यांगों को यह खुशी प्रदान करा रहा है यह केंद्र। जहां प्रति माह जरूरतमंद दिव्यांगों को मुफ्त उपकरणों का वितरण किया जाता है।

लंगड़े की चौकी स्थित इस केंद्र पर हर महीने का गुरुवार दिव्यांगों के लिए तय है। इसका अब कोई प्रचार नहीं होता। स्वत: ही इतना प्रचार हो गया है कि आगरा शहर के 30 से 40 किलोमीटर दूरी तक के दिव्यांग यहां आते हैं, जिनकी संख्या दो सौ से अधिक होती है। इनकी चिकित्सक द्वारा जांच की जाती है। उसके बाद लिंब (कृत्रिम पैर), कैलीपर्स, वैसाखी का नाप लिया जाता है। इस सबके लिए दिल्ली और अन्य नगरों से एक्सपर्ट की टीम आती है। एक, दो दिन में सभी उपकरण बना कर दिव्यांगों को वितरित कर दिए जाते हैं।

उपकरणों के निर्माण के लिए यहां स्थायी रूप से मशीनें लगी हुई हैं। भवन का एक भाग दिव्यागों के लिए समर्पित कर दिया गया है। सभी दिव्यांगों के लिए एक दिन के भोजन आदि की व्यवस्था भी इस केंद्र पर की जाती है। जरूरत पड़ने पर दिव्यांगों को ठहराने की व्यवस्था भी केंद्र पर की जाती है।

सारा काम कंप्यूटराइज्ड

इस केंद्र का प्रयास है कि उनके काम में पारदर्शिता बनी रहे। इसके लिए सारा काम कंप्यूटराइज्ड किया जाता है। दिव्यांग का नाम, पता, रोग, क्षतिग्रस्त अंग आदि का पूरा विवरण रहता है। इसके साथ ही अब हर उपकरण के साथ दिव्यांगों को फोटो भी रखते हैं।

अब तक 44 हजार लाभान्वित

हर माह के गुरुवार को दो से 250 तक दिव्यांगों के रजिस्टेशन होते हैं। इनमें 30 से 40 लोगों के पैर प्रभावित होते है, जिन्हें लिंब (कृत्रिम पैर) की जरूरत होती है। सौ कैलीपर और बाकी को विभिन्न अन्य अंगों की जरूरत होती है। सभी की जरूरतों को यहां पूरा किया जाता है। तेज बारिश, शीतलहरी में भी यहां हर गुरुवार को दिव्यांगों का काम जरूर होता है। वैसाखी, कैलीपर्स की मरम्मत भी यहां कराई जाती है।

मनाते हैं त्योहार और उत्सव

माह के पहले गुरुवार को यदि कोई त्योहार या पर्व हो तो केंद्र पर ट्रस्टी जन दिव्यांगों के साथ ही उसे मनाते हैं। समय-समय पर बहुत सारे लोग अपने जन्मदिन और विवाह दिवस यहां मनाने आते हैं। इस प्रकार दिव्यांगों के साथ खुशियां भी बहुत से लोग बांटते हैं।

सेवा में रहते हैं 20 लोग

केंद्र पर गुरुवार से लेकर उपकरण बनने में तीन और कभी-कभी चार दिन लगते हैं। इसके लिए 20 लोगों का स्टाफ यहां रहता है। इनमें चिकित्सक व टेक्नीशियन भी होते हैं। ये लोग आगरा के अलावा जयपुर, दिल्ली से भी आते हैं।

केंद्र की स्थापना

हरदयाल विकलांग केंद्र की स्थापना दिसंबर 1996 में समाजसेवी ओमप्रकाश अग्रवाल व उनकी पत्नी जनक अग्रवाल ने की। उनका सहयोग अस्थि रोग विशेषज्ञ स्व. डॉ. केपी श्रीवास्तव व आगरा में दिव्यांग सेवा का शुभारंभ करने वाले बिशनू कपूर ने किया। बिशनू कपूर बताते हैं कि पहले जयपुर की एक संस्था द्वारा जयपुर फुट बनाए जाते थे। इसके लिए दिल्ली केंद्र पर दिव्यांगों को बसों में भर कर ले जाना पड़ता था। इससे दिव्यांगों और सेवकों का समय खराब होता था। उसके बाद यहां दिव्यांग केंद्र की स्थापना की गई, जिससे ये लिंब आदि यहीं बनने लगे और दूर-दूर तक उनकी ख्याति पहुंचती गई।

हर माह आतेे हैं सेवाभावी संगठन

केंद्र हमारे निजी भवन में स्थापित है। इसके ट्रस्टी अनिल अग्रवाल, उदित नारायन, श्रेया अग्रवाल, समृद्ध अग्रवाल हैं। सेवा भावी संगठन प्रतिमाह आते हैं और उनके सहयोग से दिव्यांगों के उपकरण वितरित किए जाते हैं। इनमें लायंस क्लब, रोटरी क्लब सहित की सामाजिक संगठन हैं।

सुनील अग्रवाल, संचालक हरदयाल विकलांग केंद्र

 

Posted By: Tanu Gupta

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