आगरा, संजय रुस्तगी। कोरोना रूपी भूकंप का एपीसेंटर (केंद्र) रहे चीन के वुहान शहर का नाम ही शरीर में सिहरन पैदा कर देता है। महीनों इस शहर से भविष्य को लेकर भय और अवसाद पैदा करने वाली खबरें आईं, लेकिन अब यहां से संयम और संकल्प को मजबूत करने वाली आशावादी खबरें भी आ रही हैं। एटा के जलेसर निवासी डॉ. आशीष यादव व उनकी पत्नी नेहा लॉकडाउन के समय वुहान में ही थे। आशीष वुहान की टैक्सटाइल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। लौटे तो कोरोना से जंग और फतेह की तस्वीर लेकर।

आशीष महामारी के शुरुआती दिनों को याद कर सिहर उठते हैं। बताते हैं, एक महीने से ज्यादा घर में बंद रहे। एक-एक पल दहशत में बिताया, लेकिन धैर्य नहीं खोया। इसे अपनी जीवन शैली में ढाल लिया। घबराए नहीं। अंत में विजय मिली और इसी साहस के बूते स्वदेश लौट आए। अब अपने घर में हैं, स्वस्थ हैं। तीन बार की रिपोर्ट भी निगेटिव आई है।

बकौल आशीष वह यूनिवर्सिटी कैंपस में ही रहते थे। वुहान में 22 जनवरी को लॉकडाउन हुआ। 31 जनवरी को उनकी भारत आने वाली फ्लाइट थी। लॉकडाउन की वजह से घर में ही 'कैदÓ होना पड़ा। कुछ दिनों में घर का राशन खत्म हो गया, लेकिन हम घबराए नहीं। चीन सरकार की एडवायजरी का पालन किया। 27 फरवरी को भारत सरकार द्वारा भेजे गए विशेष विमान से वापस लौट आए।

ऑनलाइन आर्डर और गेट पर मिलता था राशन

आशीष के मुताबिक चीन सरकार ने अपने कर्मियों के अलावा सिविल सोसायटी के वालंटियर को भी व्यवस्थाओं में लगा रखा था। राशन और रोजमर्रा की जरूरतों का आर्डर ऑनलाइन दिया जाता था। अगले दिन सरकार की ओर से गेट पर राशन रखवा दिया जाता था। इसका भुगतान भी नहीं लिया जाता था। ऐसा जरूर होता कि कभी मनमाफिक वस्तु नहीं मिल पाती, तो वैकल्पिक वस्तु से काम चला लेते थे। दिन में दो बार स्वास्थ्य परीक्षण करने टीम आती थी। वह सेनेटाइजर, थर्मामीटर और मास्क जरूर चेक करते थे।

सफाई के बाद ही अंदर लाते थे सामान

आशीष बताते हैं कि कोरोना वायरस से बचने के लिए हमने दिनचर्या बदल ली थी। किसी जरूरी काम से फ्लैट से बाहर जाना पड़ता तो लौटते ही गर्म पानी से कपड़़े धोते। नहाते भी थे। सेनेटाइजर का इस्तेमाल पल-पल किया जाता था। घर के दरवाजे व खिड़की भी बंद रखते थे। घर में आने वाली वस्तुओं को भी साफ कर ही अंदर लाया जाता था।

भारत में भी बरती सावधानी

बकौल आशीष भारत में आते ही आइटीबीपी (इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस) के शिविर में आइसोलेशन में रहे। यहां 13 मार्च तक रखा गया। 14 मार्च को जलेसर आ गए। जलेसर में भी 14 दिन तक सेल्फ क्वारंटाइन रहे। एक दिन पहले ही यह खत्म हुआ है, लेकिन हम अब भी सावधानी बरत रहे हैं।

न चेते तो हालात होंगे चिंताजनक

देश में सरकार तमाम एडवायजरी जारी कर रही है, लेकिन उसका पालन नहीं हो पा रहा है। लोग लॉकडाउन में सड़कों पर घूम रहे हैं। भीड़ के रूप में बैठते हैं। घरों में भी सावधानी नहीं बरत रहे हैं। अब भी न चेते तो हालात चिंताजनक हो सकते हैं। 

Posted By: Prateek Gupta

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