आगरा, राजेश मिश्रा। विकास की दृष्टि‍ से मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने अयोध्‍या और काशी के बाद मथुरा को प्राथमिकता पर ले लिया है। प्रदेश सरकार की ओर से ही नहीं, केंद्र सरकार से भी वो मथुरा के लिए तमाम परियोजनाएं लेकर आ रहे हैं। कई शुरू भी हाे चुकी हैं। स्‍थानीय निवासियों से लेकर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की सहूलियत के दावे किए जा रहे हैं मगर व्‍यावहारिक सच्‍चाई इसके विपरीत है। वृंदावन में सबसे ज्‍यादा दिक्‍कत आवागमन को लेकर होती है। निजी वाहन हो या किराए का वाहन, बिहारी जी मंदिर तक पहुंचने में मानसिक और आ‍र्थिक कष्‍ट झेलने पड़ते हैं।

दो रास्ते पहुंचने के

आगरा-मथुरा हाइवे की ओर से वृंदावन जाने के लिए दो रास्‍ते हैं। छटीकरा और गरुण गोविंद मंदिर की ओर से। छटीकरा से आगे बढते ही रुक्‍मणि विहार स्थित मल्‍टी लेवल पार्किंग पर आपका वाहन रोक दिया जाएगा। पूरे वृंदावन में पार्किंग् का शुल्‍क 40 या 50 रुपये है मगर, यहां पर 100 रुपये वसूले जाते हैं। इसकी पर्ची में स्‍पष्‍ट लिखा है कि ये शुल्‍क आज सुबह 6 बजे से अगली सुबह 6 बजे तक मान्‍य है। मगर, यहां बैठा ठेकेदार ये शुल्‍क तीन घंटे के लिए बताता है।

इसके बाद 20 रुपये प्रति घंटा अतिरिक्‍त चार्ज वसूलता है। ठेकेदार कहता है कि ये मथुरा व‍ृंदावन विकास प्राधिकरण का रेट है, हमारा कुछ नहीं। ये अलग बात ये है क‍ि पार्किंग शुल्‍क उमा कार पार्किंग की पर्ची पर वसूला जा रहा है। भीषण गंदगी है सरकार के इस महत्‍वाकांक्षी प्रोजेक्‍ट पर। हर तरह की गंदगी यहां मिल जाएगी।मल-मूत्र भी। यहां ल‍िफ़ट का भी इंडीकेटर है, मगर चलती नहीं।

ई-रिक्‍शा की भी मनमानी

यहां से निकलने पर बाहर टिर्रियाें (ई-रिक्‍शा) के झुंड खडे मिल जाएंगे। बिहारी जी , बिहारी जी की आवाज लगा रहे ये टिर्री चालक एक-एक सवारी के 20-20 रुपये वसूलते हैं। पूरी टिर्री 100 रुपये का किराया मांगते हैं, 80 रुपये तक में जैसे-तैसे चलने को राजी होते हैं। टिर्रिंयाें के चालकों की एकात्‍मकता के पीछे सड़क के ठेकेदारों की मनमानी और दबंगई है। इन्‍हें पता है कि यहां से बिहारीजी मंदिर जाने के लिए श्रद्धालुओं के लिए कोई और जरिया ही नहीं है।

बिहारी जी के दर्शन कर सुख-समृद्धि और शांति की प्रार्थना के बाद लौटते हैं। इस मार्ग पर आपको बहुत ही कटु अनुभव होंगे। विद्यापीठ चौराहे पर काफी पैदल चलने के बाद खडे टिर्री मिल जाएंगे। ये प्रेम मंदिर तक ही जाते हैं और क‍िराया 10-10 रुपये। चौराहे से प्रेम मंदिर करीब दो तीन किलोमीटर ही है और किराया 10 रुपये। ये टिर्री भी प्रेम म‍ंदिर से बहुत पहले लगे बैरियर से पहले ही रुक जाएंगे। अब आपको मल्‍टी लेवल पार्किंग के लिए टिर्री पकड़नी है तो आधा से एक किलोमीटर तक पैदल च‍लना पडे़गा। यहां से पार्किंग की दूरी दो किलाेमीटर भी नहीं है, मगर किराया 10-10 रुपये।

किसने तय किया पार्किंग शुल्‍क

मल्‍टी लेवल पार्किंग का शुल्‍क 100 रुपये। ये किसने तय किया, ठेकेदार बोला, प्राधिकरण ने। सवाल ये है‍ कि किस आधार पर ये शुल्‍क तय किया गया। जो एक बार यहां अपनी कार पार्क करता है, दोबारा यहां नहीं आना चाहता। महंगा शुल्‍क और फि‍र बांकेबिहारी जी मंदिर तक का कष्‍ट। ऐसे में लोग प्राइवेट पार्किंग पर जाकर वाहन खड़ा करते हैं। यहां पर 40-50 रुपये लिए जाते हैं।

पार्किंग से हर रोज बे‍हिसाब कमाई

मल्‍टी लेवल पार्किंग पर एक दिन में औसतन 50 हजार से लेकर एक हजार तक वाहनों का आवागमन होता है। एक वाहन से 100 रुपये के शुल्‍क से यहां की आमदनी का आकलन किया जा सकता है। पूरे नगर में सैकडों निजी पार्किंग हैं। एक अनुमान के मुताबिक, पूरे नगर में आठ से लेकर दस हजार वाहनों की एंट्री होती है। वीकेंड और पर्व विशेष पर ये आंकडा कई गुना हो जाता है। ऐसे में वृंदावन में पार्किंग की कमाई बेहिसाब होती है। विशेष बात ये है‍ निजी पर्चियाें पर नगर निगम से शुल्‍क निर्धारण लिखा होता है। निजी पार्किंग स्‍थलों पर चार घंटे बाद अतिरिक्‍त शुल्‍क वसूला जाता है।

सरकार के राजस्‍व को चपत

नियमानुसार, पार्किंग स्‍थलों से होने वाली आय पर टैक्‍स अदा करना चाहिए। मगर, ऐसा नहीं हो रहा है। पूरी कमाई जेबों में ठूंसी जा रही है। सूत्र बताते हैं कि इस कमाई में कइयों की हिस्‍सेदारी होती है। सडक पर अराजक यातायात को सुगम बनाने के लिए पुलिसकर्मी भले ही नजर न आएं, मगर निजी पार्किंग स्‍थलों पर ये मुस्‍तैद रहते हैं। वृंदावन की संकरी गलियों में वाहन यूं ही नहीं पहुंच जाते। नगर की शायद ही कोई गली हाे जहां पर पार्किंग की कतारें न हों। सरकारी तंत्र की सरपरस्‍ती के बगैर इनका संचालन संभव ही नहीं। 

Edited By: Prateek Gupta