आगरा, जागरण संवाददाता। सफाई और सीवर समस्या को लेकर नगर निगम का विशेष सदन शुक्रवार को होने जा रहा है। सदन तीसरे पहर तीन बजे से शुरू होगा। सदन में हंगामे से इन्कार नहीं किया जा सकता है। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था पटरी से उतर गई है। निगम के अफसरों द्वारा ठीक से मानीटरिंग नहीं की जा रही है। वहीं 43 करोड़ रुपये सालाना खर्च होने के बाद भी सीवर समस्या से निजात नहीं मिल रही है। शिकायतों का निस्तारण ठीक से नहीं हो रहा है। निगम में हंगामे को देखते हुए टास्क फोर्स तैनात किया जा रहा है।

सफाई व्यवस्था एक नजर में

- सौ वार्डों से हर दिन 750 टन कूड़ा निकलता है। इसमें 400 टन सूखा और 350 टन गीला कूड़ा शामिल है।

- सूखा कूड़े को प्रासेस किया जाता है जबकि गीला कूड़ा की खाद तैयार होती है।

- 400 टन में 60 टन सिल्ट शामिल है।

- नगर निगम में हर दिन चार टन कूड़ा जलता है। पांच से छह टन कूड़ा नालों में फेंका जाता है।

- नगर निगम में 3200 स्थायी और 3000 संविदा और आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारी हैं।

- सौ वार्डों में 321 नाले हैं जिसमें 21 बड़े और 15 भूमिगत नाले हैं।

- 125 स्थायी और 200 अस्थायी डलावघर हैं।

- निगम के पास 300 मशीनें हैं।

- फागिंग की दो बड़ी और 22 छोटी मशीनें हैं।

- सफाई को लेकर हर दिन नगर निगम में 120 शिकायतें पहुंचती हैं। इसमें 65 फीसद शिकायतों का निस्तारण उसी दिया किया जाता है।

सीवर समस्या एक नजर में

- शहर में 1350 किमी लंबी सीवर लाइन है। मैनहोल की संख्या 25 हजार है।

- सात सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और 22 सीवेज पंपिंग स्टेशन हैं।

- वबाग कंपनी को हर साल 43 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है।

- नगर निगम, जल संस्थान और वबाग कंपनी के पास हर दिन 150 सीवर समस्या की शिकायतें पहुंचती हैं। हर दिन 60 फीसद शिकायतों का निस्तारण होता है।

- ताजगंज, शाहगंज, कमला नगर, आवास विकास कालोनी सेक्टर एक से 16, ट्रांस यमुना, नुनिहाई, रामबाग, बोदला, सिकंदरा, दयालबाग क्षेत्र में सीवर समस्या सबसे अधिक है।

- रोड और गलियों में सीवर उफना रहा है। शिकायतों के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया जाता है।

Edited By: Prateek Gupta