आगरा, मनोज चौधरी। ब्रज वसुंधरा के गर्भ में आज भी भगवान बुद्ध की मूर्तियों का इतिहास छिपा हुआ है। खोदाई करके इसे बाहर निकालने के लिए आज की तारीख में पुरातत्व विभाग का कोई प्लान नहीं है। कई टीले सिर्फ नाम के रह गए हैं, उन पर भवन खड़े हो गए। गोङ्क्षवदनगर का टीला पुरातत्व विभाग की नजर में है, जहां से बुद्ध मूर्तियों के मिलने की संभावना है।

ब्रज की धरती के गर्भ से करीब दो हजार साल पहले श्रीकृष्ण जन्मभूमि के समीप केशवदेव कटरा से बुद्ध की पहली प्रतिमा मिली थी। इसमें भगवान बुद्ध बोधि वृक्ष के नीचे सिंहासन पर विराजमान हैं। करीब डेढ़ हजार साल पहले जमालपुर टीले से मिली बुद्ध की दो प्रतिमाएं भारतीय मूर्ति कला अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। राजकीय संग्रहालय में डेढ़ सौ मूर्तियों को देखने के लिए रखा गया हैं। दो हजार मूर्तियां का आरक्षित संकलन है। अगले साल मेट्रोपॉलिटिन म्यूजियम न्यूयार्क अमेरिका के लिए भी मूर्तियां भेजी जाएंगी। ये सभी मूर्तियां ब्रज की धरती के गर्भ से ही प्राप्त हुई हैं।

यहां हैं संभावना

गोविंद नगर टीला संरक्षित है, इसके गर्भ से मूर्तियों मिलने की संभावना है। कई टीले ऐसे भी हैं, जो नाम के रह गए हैं। महोली गांव में चौबरा टीला था, जो 24 टीलों का समूह था। अब यहां सिर्फ ध्रुव टीला बचा है। यहां से भी बुद्ध की प्रतिमा प्राप्त हुई थीं। कंकाली टीला, भूतेश्वर टीला, चामुंडा टीला, गोवर्धन, सौंख, आन्यौर से भी मूर्तियां प्राप्त हुई हैं।

क्‍या है इनका कहना 

राज्य और केंद्र सरकार ने अलग-अलग टीलों को संरक्षित कर लिया है। राज्य सरकार ने अभी मथुरा के टीलों के खोदाई के लिए कोई प्लान नहीं बनाया है। गोङ्क्षवदनगर टीले से कुछ मूर्तियों के मिलने की संभावना है। जो संरक्षित है।

डॉ. एसके दुबे, क्षेत्रीय अधिकारी पुरातत्व विभाग

बुद्ध की प्रतिमाओं का अध्ययन करने के लिए चीन, जापान, अमेरिका, ब्रिटेन, आस्ट्रिया, वियतनाम, कोरिया समेत कई देशों से साल भर में करीब चार से पांच हजार शोधार्थी यहां आ रहे हैं।

एसपी सिंह, सहायक निदेशक राजकीय संग्रहालय 

लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: Tanu Gupta