आगरा, जागरण संवाददाता। बेहतर भाव, बाजार नहीं मिल पाने के कारण हर वर्ष आलू को बर्बादी झेलनी पड़ती है। 10 से 15 फीसद आलू किसान फेंकने को मजबूर होते हैं, जबकि प्रसंस्करण उपयोगी प्रजातियां नहीं होने से कंपनियां रुझान नहीं दिखाती हैं। आलू किसानों को बेहतर बाजार दिलाने और उनको प्रसंस्करण कंपनियों की आवश्यकता बताते के लिए गुरुवार को चिंतन होगा। इसमें मंडलभर के किसान और नामी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों की मौजूदगी में चिंतन होगा।

उप्र राज्य औद्यानिक सहकारी विपणन संघ (हाफेड) द्वारा फतेहाबाद रोड स्थित एक होटल में क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़ी नामी कंपनियाें के प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे। कंपनियाें को किस तरह का आलू चाहिए, उसकी गुणवत्ता कैसी होनी चाहिए के बारे में किसानों को बताया जाएगा। वहीं किसान अपनी आवश्यकता बताएंगे और उन्नत प्रजाति के बीज उपलब्ध नहीं होने पाने की बात भी साझा करेंगे। हाफेड के अधिकारी दोनों की आवश्यकता समझेंगे और समस्याओं के निराकरण के लिए बिंदु तैयार किए जाएंगे। सम्मेलन में निर्यात और घरेलू विपणन में आने वाली मुश्किलों पर भी चर्चा होगी और समाधान के रास्ते निकाले जाएंगे। हाफेड के मैनेजिंग डायरेक्टर अंजनि कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य दोनों पक्ष की आवश्यकता, समस्या पर चर्चा और समाधान के रास्ते निकालना है। सरकार किसानों की आय दोगुना करना चाहती है, जिसके लिए आलू को बेहतर बाजार मिलना जरूरी है। इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को प्रसंस्करण कंपनियों की मांग से अवगत कराया जाएगा। उस तरह की प्रजातियां किसान उगाएंगे तो बाजार मिलने में मुश्किल नहीं होगी। कार्यक्रम का शुभारंभ सांसद राजकुमार चाहर करेंगे तो मंडी के निदेशक अंजनी कुमार सिंह भी सम्मिलित होंगे।

 

Edited By: Prateek Gupta