यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 03, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कुछ तो करो सरकार, कहां तक ले जाओगे पेट्रोल और डीजल के दाम, अब कराह रहा आम आदमी
ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के सामने भी खड़ा हो गया बड़ा संकट। कई ट्रांसपोर्टरों ने अपने ट्रक खेतों में ले जाकर खड़े ...और पढ़ें

आगरा, जागरण संवाददाता। हरीपर्वत चौराहे के निकट स्थित पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल डलवा रहे निजी कंपनी में काम करने वाले राजन गुप्ता का कहना था कि महंगाई अनियंत्रित हो गई है। पेट्रोल 100 रुपये लीटर होने की आशंका लोग जताते थे, लेकिन अब 106.70 रुपये हो गया है। आम आदमी पर बड़ा बोझ पड़ रहा है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसलिए अनावश्यक खर्च घटा दिया है। पम्प पर दूसरी मशीन से डीजल डलवा रहे व्यापारी रौनक का कहना था कि त्योहार पर गाड़ी मजबूरन निकाली है। दामों में हो रही वृद्धि के कारण एक महीने से गाड़ी अवकाश के दिनों में भी नहीं निकाली थी, 98.64 रुपये प्रति लीटर डीजल लेना मुश्किल है। वहीं ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का डीजल के दाम बढ़ने से बुरा हाल है, वे भाड़ा बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। कई ट्रांसपोर्टरों ने अपने ट्रक खेतों में ले जाकर खड़े कर दिए हैं, लोन पर लिए गए ट्रक की किश्त चुकाने के पैसे नहीं हैं क्योंकि डीजल में लगातार मूल्यवृद्धि के कारण भाड़े में बचत नहीं हो रही है। उन्हें डर है कि कहीं फाइनेंस कंपनी वाले ट्रक को खींच नहीं ले जाएं।
डीजल, पेट्रोल के तेजी से बढ़ते हुए दामों को लेकर जहां आम आदमी में आक्रोश है, तो वह त्योहार पर कहीं घूमने का कार्यक्रम भी नहीं बना पा रहे हैं। पेट्रोल के दामों में प्रतिदिन इजाफा हो रहा है। अक्टूबर में दाम सैकड़ा पार कर गए हैं, जबकि नवंबर में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। नालबंद स्थित पम्प पर पेट्रोल डलवा रहे सौरभ ने महंगाई नाराजगी जताई। वहीं डीजल के दाम बढ़ने से पहले से ही मंदी की मार झेल रहे ट्रांसपोर्ट करोबार के सामने और बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ट्रांसपोर्टर दीपक खंडेलवाल का कहना था कि डीजल के मूल्य में बेहिसाब इजाफा हो रहा है। अगर भाड़ा बढ़ाया गया ताे दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर उनका असर सीधा देखने को मिलेगा। ट्रांसपोर्टर दीपक शर्मा का कहना था कि डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए। अगर दाम ऐसे ही बढ़ते रहे तो कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा।
