आगरा, डा. संदीप शर्मा। बड़ा ही अजब मामला है ये। आठ साल पहले जो पॉलिसी बंद हो चुकी है, उसमें अंशदान जमा करने के नाम पर हर महीने सरकारी शिक्षकाें के खाते से रकम कटौती की जा रही है और दिलचस्प बात ये है कि ये पैसा जा कहां रहा है, ये पता ही नहीं।

दरअसल बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विदयालयों में वर्ष 2014 के बाद भर्ती हुए शिक्षक व कर्मचारी सामूहिक बीमा के नाम पर ठगे जा रहे हैं। उनके खाते से हर महीने 87 रुपये की योजना के नाम पर कट रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि बीमा राशि कौन सी कंपनी ले रही है। हद तो यह है कि कोविड संक्रमण से जान गंवाने वाले उक्त शिक्षकों को बीमा राशि का लाभ तक नहीं मिला।

यह सिर्फ आगरा नहीं, बल्कि प्रदेशभर के बेसिक परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों की स्थिति है, जबकि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआइसी) ने शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सामूहिक जीवन बीमा पालिसी संख्या क्रमंक 4521 व 116846 को 31 मार्च 2014 को बंद कर दिया है। 31 मार्च 2014 के पूर्व नियुक्त शिक्षक तो इस बीमा योजना से लाभांवित हैं, लेकिन बाद में नियुक्त शिक्षकों व कर्मचारियों को योजना में कवर नहीं मिल रहा, फिर भी उनके वेतन से आठ साल से कटौती जारी है।

करोड़ों में हो रही कटौती

प्रदेशभर में डेढ़ लाख से अधिक परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान में कार्यरत 4.5 लाख से अधिक शिक्षकों में से करीब दो लाख शिक्षक भी एक अप्रैल 2014 के बाद नियुक्त माने जाएं, तो शिक्षक प्रतिमाह करीब पौने दो करोड़ की कटौती करा रहे हैं।

विभाग के संज्ञान में है मामला

बेसिक शिक्षा परिषद के वित्त नियंत्रक रवींद्र कुमार ने सभी जिलों के वित्त एवं लेखाधिकारियों को पत्र लिखकर 31 मार्च 2014 के पूर्व और बाद में नियुक्त शिक्षकों और कर्मचारियों की सूचना मांगी है।

ब्याज समेत वापस हो कटौती राशि

प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश संगठन मंत्री बृजेश दीक्षित का कहना है कि सामूहिक बीमा योजना बंद हैं, लेकिन कटौती जारी है। कई बार अधिकारियों से कटौती बंद करने का अनुरोध किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 31 मार्च 2014 के बाद नियुक्त शिक्षको से जितने रुपये लिए गए हैं, उन्हें ब्याज समेत लौटाया जाए।

यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर का कहना है कि सामूहिक बीमा के नाम पर शिक्षकों के खातों से राशि काट रही है, लेकिन लाभ शिक्षकों को नहीं मिल रहा, यह अनियमितता है। बीमा राशि काटना बंद हो और काटी गई राशि ब्याज समेत वापस हो, नहीं तो संगठन कोर्ट की शरण लेगा।

करा रहे हैं स्थिति स्पष्ट

मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (एडी) बेसिक महेश चंद का कहना है कि मामला की शिकायत मिली है, वित्त एवं लेखाधिकारी को जांच कर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

Edited By: Prateek Gupta