आगरा, अजय दुबे। मर्ज का रावण जिंदगी लील रहा है, इससे बचाने के लिए इलाज के तीर चलाने होंगे। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है, निजी अस्पताल का इलाज महंगा है। झोलाछाप से इलाज कराने से मरीजों की मौत हो रही हैं।

ये हैं दशानन

- झोलाछाप हॉस्पिटल और क्लीनिक में हो रहीं मौतें

झोलाछाप क्लीनिक के बाद हॉस्पिटल भी खुल गए हैं। इसमें डॉक्टर के बिना मरीजों का इलाज किया जा रहा है। पिछले तीन महीने में चार गर्भवती महिलाओं की प्रसव के दौरान तबीयत बिगडऩे से मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने श्री बांके बिहारी हॉस्पिटल, संजीवनी हॉस्पिटल, सरोज हॉस्पिटल, सरस्वती हॉस्पिटल को सील किया है। दो दर्जन से अधिक झोलाछाप पर कार्रवाई हो चुकी है। इसके बाद भी झोलाछापों पर रोक नहीं लग सकी है।

- आयुष्मान का इलाज दे रहा दर्द

आयुष्मान योजना से 1.63 लाख परिवार के आठ लाख सदस्यों को पांच लाख रुपये तक का निश्शुल्क इलाज दिया जाना है। इसके लिए गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं, अभी तक 87 हजार गोल्डन कार्ड ही बने हैं। 4500 मरीजों को इलाज मिला है। निजी अस्पतालों में मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है, कुछ अस्पतालों ने अनुबंध खत्म कर दिया है।

- नकली और अवैध दवाओं का काला कारोबार

इस साल सिकंदरा में दो नकली दवा की फैक्ट्री पकड़ी जा चुकी है, जांच में दवाएं अधोमानक निकली हैं। डॉक्टर के बगल में ही दवाएं मिलने और एमआरपी से अधिक रेट पर दवाओं की बिक्री पर छापे मारे जा रहे हैं, मेडिकल स्टोरों पर सील लगाई गई है।

- टिंचर और नारकोटिक्स की दवाओं से नशा

नशे के लिए टिंचर और नारकोटिक्स की दवाओं का दुरुपयोग बढ़ा है, कफ सीरप को नशे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। औषधि विभाग की टीम ट्रांसपोर्ट कंपनी से बड़ी मात्रा में नशे के सीरप जब्त कर चुकी है।

- स्वास्थ्य केंद्रों से डॉक्टर गायब, मरीज परेशान

देहात में स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर नहीं पहुंच रहे हैं। इससे देहात में मरीजों को झोलाछाप से इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम के निरीक्षण में स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं।

- एसएन से दुत्कारे जा रहे मरीज

एसएन इमरजेंसी से लेकर वार्ड और ओपीडी में मरीजों को दुत्कार कर भगाया जा रहा है। वहीं, मरीज और जूनियर डॉक्टरों के बीच विवाद के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

- एक रुपये के पर्चे पर 500 रुपये की दवाएं

सरकारी अस्पतालों में एक रुपये के पर्चे पर परामर्श मिल रहा है। मगर, मरीजों को दवाएं बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं। इससे इलाज महंगा हो गया है। सामान्य बीमारी में भी एक-एक पर्चे पर पांच-छह सौ रुपये की दवा लिखी जा रही है।

- निजी अस्पतालों का इलाज महंगा, कमीशन का खेल

निजी अस्पतालों का इलाज महंगा है, जांच से लेकर दवाओं तक में कमीशन का खेल चल रहा है। इससे सस्ती दवाएं और जांच मरीजों के लिए महंगी साबित हो रही हैं।

- अधूरे प्रोजेक्ट से कराह रहा सरकारी इलाज

जिला अस्पताल में नई ओपीडी ब्लॉक बन चुका है लेकिन अग्निशमन की विभाग की एनओसी के न मिलने से नई ओपीडी बंद पड़ी हैं, भूतल ही इस्तेमाल हो रहा है। 200 करोड़ से इसी साल जनवरी में सुपर स्पेशलिटी का काम शुरू हुआ है, यह बहुत ही धीमी गति से चल रहा है।

- आयुर्वेदिक अस्पताल के लिए नहीं मिली जमीन

आयुर्वेदिक अस्पताल के लिए 10 करोड़ का बजट एक साल पहले आ चुका है लेकिन अस्पताल के लिए जगह नहीं मिली है। इससे आयुर्वेदिक अस्पताल नहीं बन सका है।

इस तरह हो इलाज

- झोलाछाप के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, मुकदमा दर्ज कराने के साथ झोलाछापों की सूची सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा कराई जाए।

- आयुष्मान योजना के लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनाने के साथ उन्हें निश्शुल्क इलाज कराने के लिए जागरूक किया जाए।

- सुपर स्पेशलिटी विंग, आयुर्वेदिक अस्पताल सहित अधूरे प्रोजेक्ट का कार्य तेज गति से कराया जाए।

- दवाओं के अवैध कारोबार पर रोकथाम को औषधि विभाग अभियान चलाए।

- आइएमए द्वारा इलाज सस्ता करने के लिए रणनीति बनाई जाए।

विशेषज्ञों की राय

झोलाछाप के खिलाफ लगातार अभियान चल रहा है, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जा रहा है।

डॉ. मुकेश वत्स, सीएमओ

पिछले कुछ समय में एसएन की व्यवस्थाओं में सुधार हुआ है, नए प्रयोग भी किए जा रहे हैं। जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।

डॉ. जीके अनेजा, प्राचार्य एसएन मेडिकल कॉलेज  

Posted By: Tanu Gupta

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