आगरा, जेएनएन। गिरिराज महाराज की नगरी की तस्वीर बदलने वाली है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण में शुक्रवार को गिरिराजजी की परिक्रमा के मामले को लेकर हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस रघुवेंद्र ङ्क्षसह राठौड़ और डॉ. सत्यवान ङ्क्षसह ङ्क्षसह गब्र्याल की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार को श्राइन बोर्ड और राजस्थान सरकार को सर्विस रोड के साथ ही पूंछरी लौठा से शिफ्ट किए जाने वाले मंदिर मामले में कड़ी फटकार लगाई।

एनजीटी के समक्ष उ.प्र. शासन में अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कहा आचार संहिता समाप्त होने के श्राइन बोर्ड के गठन का एप्रूवल अगले पंद्रह दिन में कैबिनेट से ले लेंगे। कोर्ट के समक्ष दानघाटी मंदिर की भेंट राशि के गबन का मामला भी रखा गया।

एक फरवरी 2019 को अपर मुख्य सचिव ने न्यायालय के समक्ष बयान दिया था कि पंद्रह दिन के अंदर कैबिनेट से श्राइन बोर्ड के गठन का एप्रूवल हासिल कर लेंगे, लेकिन आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो जाने के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्टैंङ्क्षडग काउंसिल अमित तिवारी से श्राइन बोर्ड के गठन की प्रगति की जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में उन्होंने कोर्ट को यह जानकारी दी।

याची आनंद गोपाल और सत्यप्रकाश मंगल ने कोर्ट को प्रार्थना पत्र देकर अवगत कराया कि गोवर्धन के प्रमुख दानघाटी मंदिर की भेंट राशि में से करोड़ों रुपये का गबन प्रबंधक डालचंद चौधरी ने किया है। याची के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने कोर्ट के समक्ष जुलाई में आयोजित होने वाले मुडिया पूर्णिमा मेला को लेकर आवश्यक कदम उठाए जाने की गुजारिश की और साथ में कोर्ट को अवगत कराया कि अभी गोवर्धन में पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती नहीं की गई है। अधिवक्ता चतुर्वेदी ने बताया कि न्यायालय मंदिर की राशि के गबन के मामले को संज्ञान लेते हुए अपने पूर्व के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि इसलिए ही श्राइन बोर्ड बनाया जाना जरूरी है। अन्यथा इस स्थिति में गोवर्धन के विकास में बन रहे बाधक मंदिरों का पैसा इसी तरह बर्बाद कर देंगे। अगली सुनवाई 27 जून को होगी। कोर्ट ने अगली सुनवाई को डीएम को मौजूद रहने और अपर मुख्य सचिव पर्यटन अविनाश अवस्थी से भी जवाब तलब करने को कहा है। 

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Posted By: Tanu Gupta