आगरा, जेएनएन। बरसाना के पिसावा गांव में सोमवार को जिसने भी सात वर्षीय बालिका देवकी के शव को देखा, वह दृश्य उनकी आंखों के सामने दूसरे दिन भी तैरता रहा। एक तरफ घर में कोहराम मचा हुआ है तो दूसरी तरफ ग्रामीण दहशत में हैं। वे अपने बच्चों की हिफाजत को लेकर चिंतित हैं। आसपास के गांवों में भी श्वानों के खूंखार होने से भय का वातावरण बना हुआ है।

पिसावा निवासी भूप सिंह की सात वर्षीय पुत्री देवी अपने पिता को सोमवार दोपहर में भोजन देने के लिए खेत पर जा रही थी। रास्ते में उसको श्वानों ने घेर लिया और नोंच-नोंच कर उसको मार डाला। इस घटना से ग्रामीण दहल गए थे। मंगलवार को भूप सिंह की पत्नी रामवती देवी ने अपनी पुत्री की याद में खाना भी नहीं खाया था। उसकी आंखों से आंसू बंद नहीं हो रहे थे। पिता भी ग्रामीणों के बीच गुमशुम बैठे हुए थे। देवकी का भाई हर्षवर्धन, युवराज, बहन द्रोपती और खुशबू भी आनजाने वाले को टकटकी लगाकर देख रही थीं। सांत्वना देने के लिए घर पहुंच रही महिलाओं से देवकी मां लिपट लिपट कर रो रही थी। इधर, गांव में भी अजीब सी दहशत छाई है। लोग अपने बच्चों की हिफाजत को लेकर चिंतित हैं। इसकी वजह साफ है, गांव और आसपास के क्षेत्र में अभी भी खूंखार श्वान घूम रहे हैं। ग्रामीणों का कहना था कि इन श्वानों के मुंह इंसानी खून लग गया है। कब किस पर कहां हमला बोल दें। कोई नहीं जनता, इसलिए अब वह अपने बच्चों को अकेला कहीं भी भेजने से डर रहे हैं। इतना ही नहीं आसपास के इलाकों में भी इन श्वानों के कारण भय का माहौल बना हुआ है।

सिर्फ निर्देश तक सिमटी कार्रवाई

हादसे से पहले प्रशासन और वन विभाग को श्वानों के इतने खूंखार होने की भनक तक नहीं लगी थी। कहने को जिला अस्पताल और ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रोज श्वान के काटे लोग उपचार के लिए पहुंच रहे है। इसके बाद भी प्रशासन की आंख नहीं खुली पाई कि इस तरह के जानवरों से निपटने के लिए कोई अभियान छेड़ा जाए। इस संबंध में जब एसडीएम छाता रामभक्त राम से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि वन विभाग को ऐसे श्वानों को पकडऩे के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन इन निर्देशों का पिसावा क्षेत्र में कोई असर नहीं आया। अभी तक खूंखार हो चुके श्वानों को पकडऩे के लिए कोई अभियान नहीं छेड़ा गया है।

क्‍या कहते हैं पीडि़त

मैने अभी अप्रैल माह में बेटी का एडमिशन प्राइमरी स्कूल में कराया था। लेकिन मुझे क्या पता कि मेरी बेटी जल्द ही इस दुनिया से विदा हो जाएगी। पांच भाई बहनों में मेरी सबसे लाडि़ली बेटी और सबसे छोटी बेटी थी।

भूपसिंह मृतक बच्ची के पिता।

श्वानों के इस हमले से गांव और उसके आसपास के इलाके में भय का माहौल पैदा कर दिया है। बच्चों को खेत पर भेजने में भी अब डर लग रहा है। जंगल करीब एक दर्जन श्वान अभी घूम रहे हैं।

वेदराम ग्रामीण।

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Posted By: Tanu Gupta