आगरा [जेएनएन]: बिजली मिस्त्री की नृशंसता से हत्या के बाद परिजन बेहाल थे। कंकाल को समेटकर उन्होंने पुलिस को सौंप दिया। घर पर आसपास के लोगों की भीड़ थी, लेकिन अंतिम संस्कार को उन्हें कंकाल भी नहीं मिला। ऐसे में उन्होंने खत्ताघर से कंकाल के कुछ टुकड़े बीने और उन्हीं से सांकेतिक अंतिम संस्कार कर दिया।

एत्मादपुर के सतौली निवासी 42 वर्षीय चंद्रपाल का शव 17 अक्टूबर को लापता होने के बाद 22 अक्टूबर की रात को बरामद हुआ था। आरोपित अशोक दिवाकर ने शव खत्ताघर में दबा दिया था। उसे गलाने के लिए वह हर शाम को केरोसिन डालकर आता था। कमर से नीचे का हिस्सा गायब था। सिर अलग था। कंधे से हाथ भी अलग थे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। वहां से चिकित्सकों ने डीएनए जांच की सिफारिश कर दी और शव को सीलकर पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने शव एत्मादपुर थाने की छत पर टिनशेड में रख दिया। इसके बाद परिजनों को शव देने से पुलिस ने इन्कार कर दिया। अंतिम संस्कार को परिजन और रिश्तेदार घर पर जमा थे। इसलिए परिजनों ने 23 अक्टूबर को फिर खत्ताघर जाकर वहां से कंकाल के कुछ टुकड़े बीने और मिट्टी ले ली। उसी से उन्होंने सांकेतिक अंतिम संस्कार कर दिया।

दो बार सीओ और एक बार इंस्पेक्टर से मिले

चंद्रपाल के भाई पूरन ने बताया कि वे शव मिलने के बाद उसे डीएनए जांच को भेजने के लिए पहले इंस्पेक्टर एत्मादपुर से मिले थे। इंस्पेक्टर ने उनसे कहा कि यह हमारा मामला है। अपने हिसाब से हम भेज देंगे। तुम चिंता मत करो। इसके बाद परिजनों ने इंतजार किया। न भेजने पर वे सीओ एत्मादपुर से मिले। सीओ ने इंस्पेक्टर को कॉल कर कहा कि कंकाल को डीएनए जांच के लिए जल्द भेज दो। उन्होंने एक दो दिन का समय दिया। इसके बाद भी शव नहीं भेजा गया। दूसरी बार फिर परिजन सीओ से मिले, लेकिन कोई हल नहीं निकला।  

Posted By: Prateek Gupta

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