आगरा, जागरण संवाददाता। यूं तो खबर राहत देने वाली है लेकिन चौकन्‍ना रहने की जरूरत भी है। जरा सी चूक हुई तो भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। वैसे तो खतरा अभी 100 किमी दूर है। संभावना जताई जा रही है कि बुधवार की तरह गुरुवार को भी किसानों का दुश्‍मन यानि टिड्डी दल आगरा के बार्डर को पार नहीं करेगा लेकिन फिर भी एहतियात बरती जा रही है। अगर हवा का रुख जरा भी बदला तो बड़ी आफत जिले को झेलनी पड़ सकती है।

धौलपुर के करीब से बुधवार सुबह उड़े टिड्डी दल ने आगरा के किसानों, कृषि विभाग की सांसे थाम दी थीं। दल ने हवा के साथ जिले का रुख किया तो सीमा से लगे गांव के किसान थाली, घंटे लेकर खेतों में पहुंच गए। कृषि विभाग ने स्प्रे मशीन के साथ ही ऊंची अवाज के वाहनों की व्यवस्था कर ली। आगरा की सीमा से 10 किमी दूरी से दल ने मप्र की सीमा की ओ रुख किया और उसके बाद राजाखेड़ा होता हुआ दूर निकल गया। दोपहर बाद सभी ने राहत की सांस ली, लेकिन गुरुवार को जयपुर से चले चौथे टिड्डी दल ने फिर धकड़ने तेज कर दी हैं। दो दलों में बंटा टिड्डियों का चौथा दल अभी जिले की सीमा से 100 किमी की दूरी पर है। बुधवार को आगरा के करीब से निकले टिड्डी दल की लंबाई दो किलोमीटर और चौड़ाई चार किमी थी। मंगलवार रात इसकी दूरी आगरा से 30 किमी थी, जिससे विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया था। बुधवार सुबह से कसरत शुरू हुई। खेरागढ़, जगनेर के सीमा के गांव पर स्प्रे मशीन पहुंची तो जिला प्रशासन की टीमों के साथ कृषि विभाग की टीम भी मुस्तैद थी। जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. रामप्रवेश राजस्थान सीमा के बसई बार्डर पर निरीक्षण निगरानी को पहुंच गए तो दूसरे सीमा से जुड़े गांव को भी दौड़ लगाई। खतरा टलने के बाद ही सभी आश्वस्त हुए। वहीं बुधवार रात को दौंसा क्षेत्र पहुंचे दल की आगरा से दूरी 100 किमी बताई जा रही है। इसका रुख हवा पर निर्भर करेगा।

किसान रहें तैयार, जुलाई तक खतरा

जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. रामप्रवेश ने बताया कि टिड्डी दल का रुख हवा के रुख पर भी निर्भर करता है। सभी दल दो किलाेमीटर लंबाई के हैं, लेकिन कई बार पहाडियाें से टकराकर टूटने से ये दो, तीन भागों में भी बंट जाते हैं। जुलाई तक इनके आने की आशंका है। कृषि विभाग की स्प्रे मशीन तैयार है, और किसानों को भी जागरुक रहने के लिए कह दिया गया है। टिड्डी दल खेत के खेत चट कर जाते हैं। जिले में इस समय खेतों में हरा चारा, मूंग, सब्जियां और बागों में जामुन, नीबू, फालसे, आम, अमरुद के पेड़ों पर फल, फूल आ रहे हैं।

ऐसे करें बचाव

जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि टिड्डी दल काे भगाने के लिए किसान नगाड़े, थाली बजा सकते हैं। ये ध्वनि से भागता है। किसान खेतों में क्लोरोपाइरीफांस 20 फीसद या मैलाथियान 96 फीसद कीटनाशक का छिड़काव कर सकते हैं।

विधायक ने भी संभाला मोर्चा

विधायक महेश गोयल भी जगनेर क्षेत्र के बार्डर पर स्प्रे मशीन लेकर मुस्तैद रहे। उनका कहना था कि अपने बाग के साथ ही किसानों की फसलों की सुरक्षा के लिए इंतजाम किए गए हैं। 

Posted By: Tanu Gupta

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