आगरा, जागरण संवाददाता। वर्ष 2020 के पहले पखवाड़ेे का चंद्रमा ग्रहण के साये में आएगा। 10-11 जनवरी को पौष पूर्णिमा के अवसर पर उपछायी चंद्रग्रहण होगा। 2019 का अंत सूर्य ग्रहण के साथ हुआ था तो अब नववर्ष के पहले पखवाड़े में चंद्रग्रहण हो रहा है। ज्‍योतिषाचार्य डॉ शोनू मेहरोत्रा के अनुुुसार इस साल 10-11 जनवरी को उपछायी चंद्रग्रहण लग रहा है। यह इस साल का पहला चंद्र ग्रहण होगा। उपछायी चंद्रग्रहण मेंं पृथ्वी की छाया वाले क्षेत्र में चंद्रमा आ जाता है और चंद्रमा पर पड़ने वाला सूर्य का प्रकाश कटा हुआ प्रतीत होता है। यह ग्रहण एशिया, यूरोप, अफ्रीका और ऑस्टेलिया के कुछ हिस्सों में यह देखने को मिलेगा।

चंद्र ग्रहण 10 जनवरी की रात्रि 22:39 से 2:40 तक दिखाई देगा। चंद्र ग्रहण का सूतक सुबह 12 घण्टे पहले शुरू हो जाता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। धार्मिक दृष्टि से भी इस ग्रहण के बहुत अधिक मायने हैं। पूर्णिमा के दिन इस चंद्र ग्रहण पर दान पुण्य का खास महत्व होगा। इस दिन पौष पूर्णिमा है। हिन्दू धर्म में यह दिन बेहद खास माना जाता है। इस दिन गुरू की पूजा की जाती है इसलिए इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करेंगे। वहीं 10 जनवरी से प्रयागराज में माघ मेले की भी शुरुआत हो रही है। मेला 10 जनवरी को पौष पूर्णिमा से शुरू होकर 21 फरवरी को महाशिवरात्रि तक चलेगा।

दान है विशेष महत्‍व

ऐसा भी माना जाता है कि पौष माह की पूर्णिमा पर स्नान और दान से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए मोक्ष की कामना रखने वाले बहुत ही शुभ मानते हैं। क्योंकि इसके बाद माघ महीने की शुरुआत होती है। मान्‍यता है कि यदि चंद्र ग्रहण के दौरान किसी सरोवर में स्नान किया जाए तो सभी पाप धुल जाते हैं। इसके अलावा काले उड़द, चावल जैसी चीजों का दान भी करना चाहिए। इससे खुशहाली आती है।

ये बरतें सावधानियां

- ग्रहण के दौरान कोई नया काम न शुरू करें।

- ग्रहण शुरू होने से पहले खाने मे तुलसी जी के पत्ते डाल दें एवं ग्रहण के समय तुलसी जी को स्पर्श न करें।

- ग्रहण के दौरान न खाना बनाएं और न ही खाएं।

- गर्भवती स्त्रियां तेज धारदार औजारों का इस्तेमाल न करें।

- ग्रहण का समय धार्मिक पुस्तकें पढ़े एवं हवन और मंत्रों का जाप करें।

- ग्रहण के समय देवी देवताओं की मूर्ति एवं तस्वीरों को नही छूना चाहिए।

- ग्रहण के दौरान शारीरिक संबंध नही बनाने चाहिए।

- ग्रहण की समाप्ति के बाद पूरे घर मे गंगा जल का छिड़काव करें।

चंद्र देव का पूजन करें एवं ध्यान लगाने की कोशिश करें।

- ग्रहण समाप्ति के अगले दिन ज़रूरतमंदों को आवश्यक वस्तुओं का दान करें।

 

Posted By: Tanu Gupta

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