आगरा, जागरण टीम। दावा है कि विश्व में यह अपने किस्म का नौ मंजिल वाला पहला मंदिर है। आठ बीघे में मंदिर तो पांच बीघे में यहीं पर गौशाला है। विशाल पागल बाबा हॉस्पिटल भी बना है। जहां हजारों रोगियों का रोजाना उपचार किया जाता है। मंदिर के खर्च पर दिल्ली ले जाकर ऑपरेशन भी कराए जाते हैं। वृंदावन के दो आश्रमों की भांति असम के दो और बिहार के एक आश्रम में भी रोजाना हजारों लोगों की खिचड़ी सेवा की जाती है।

ये है आकर्षण का केंद्र

तीर्थनगरी वृंदावन स्थित महामाया काली के अनन्य उपासक सिद्ध संत पागल बाबा की समाधि मंदिर में है। सफेद पत्थरों से बने इस नौ मंजिल के मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है। ये मंदिर 221 फीट ऊंचा सफेद संगमरमर के पत्थरों से बना हुआ है। पागल बाबा मंदिर को देखने के लिए दूर दराज से लोग आते हैं। यह मंदिर करीब 150 फीट चौड़ाई में बना है।

मंदिर का इतिहास

वर्ष 1969 में तपोमूर्ति लीलानंद ठाकुर पागल बाबा ने मंदिर का निर्माण करने की योजना बनाई थी। मथुरा मार्ग पर संगमरमर का नौ मंजिला लीलाधाम (पागल बाबा का मंदिर) की स्थापना कर दी। श्वेत प्रस्तर जड़ित 18 हजार वर्ग फीट और 221 फीट की ऊंचाई वाले इस मंदिर की प्रत्येक मंजिल पर देव प्रतिमा स्थापित हैं। बाबा ने ऐतिहासिक गोपेश्वर महादेव के पास स्थित भूतगली में लीला कुंज का भी निर्माण किया। कालांतर में लीलाकुंज पुराने पागल बाबा के रूप से प्रसिद्धि को प्राप्त हुआ। 24 जुलाई 1980 को बाबा ने नश्वर शरीर का त्याग कर समाधि ले ली।

इसलिए विख्यात है मंदिर

पागल बाबा मंदिर या नौ मंजिला लीलाधाम के मुख्य ट्रस्टी जिला न्यायाधीश और जिलाधिकारी हैं। मथुरा-वृंदावन मार्ग किनारे स्थित यह मंदिर अपनी सुंदरता के लिए प्रख्यात है। पागल बाबा मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम की स्वचलित गैलरी नए स्वरूप में है।

ये है मान्यता

संत श्रीमद्लीलानंद ठाकुर-पागल बाबा आश्रम किसी चमत्कारिक स्थल से कम नहीं हैं। मंदिर में सुबह आठ से रात आठ बजे तक इलेक्ट्रॉनिक पद्धति से कृष्णलीला, रामलीला और पागल बाबा लीला अनवरत होती रहती है। वरिष्ठ सेवायत और मंदिर के कार्यालय प्रभारी दाऊदयाल शर्मा ने बताया कि मंदिर की देखरेख के लिए पांच लोगों का बोर्ड है। डीएम इसके चेयरमैन हैं। 20 लोगों की कार्य समिति भी है। 

Edited By: Abhishek Saxena