आगरा, जागरण संवाददाता। पुलिस भर्ती परीक्षा में तकनीकी सहायक कंपनी टाटा टेलीकॉम सर्विसेज (टीसीएस) के कुछ कर्मचारी ही सॉल्वरों के गैंग में शामिल हो गए। वे रुपये लेकर सॉल्वरों का बायो मैट्रिक मशीन से सत्यापन कर रहे थे। पुलिस ने कंपनी के कर्मचारी समेत चार को गिरफ्तार कर इसका पर्दाफाश कर दिया। अभी कुछ अन्य कर्मचारियों के शामिल होने की आशंका है।

पुलिस लाइन में 26 नवंबर से पुलिस भर्ती परीक्षा के प्रमाण पत्र सत्यापन और बायो मैट्रिक परीक्षण चल रहा है। इसमें पुलिस अब तक बीस से अधिक सॉल्वर और उन्हें बैठाने वाले अभ्यर्थी पकड़ चुकी है। 12 दिसंबर को खंदारी क्षेत्र में रहने वाले टीसीएस के अधिकारी अरविंद सिंह को धमकी देने के मामले की जांच की आंच कर्मचारियों तक पहुंच गई। क्राइम ब्रांच और हरीपर्वत पुलिस ने रविवार रात कंपनी के कर्मचारी बल्देव के रहने वाले तरुण गौतम, उसके भाई प्रवीन, फरह के रूपेंद्र और फीरोजाबाद के एका निवासी विक्रम को गिरफ्तार कर लिया। इनसे पूछताछ में सॉल्वर और कंपनी के कर्मचारियों की मिलीभगत का मामला खुल गया। एसपी सिटी रोहन बोत्रे ने पत्रकार वार्ता में बताया कि कंपनी के कर्मचारी पुलिस लाइन में बायो मैट्रिक सत्यापन कर रहे हैं। सभी खंदारी क्षेत्र में किराए पर रहते हैं। तरुण पुलिस लाइन से एक बायो मैट्रिक फिंगर प्रिंट एंड कैमरा डिवाइस अपने कमरे पर ले आया। इसके बाद उन्होंने खेल शुरू कर दिया। विक्रम के माध्यम से दो अभ्यर्थी फतेहाबाद के भगवती और खेरागढ़ के दलवीर की जगह सॉल्वर बायो मैट्रिक परीक्षण कराने आए। दोनों का 11 दिसंबर को बायोमैट्रिक परीक्षण घर बुलाकर कर दिया। इनसे 60-60 हजार रुपये लिए गए थे। लेनदेन को लेकर रूपेंद्र ने तरुण के इशारे पर टीसीएस अधिकारी अरविंद को धमकी दी थी। इसके बाद ही पुलिस उन तक पहुंची। एसपी सिटी ने बताया कि इस गैंग में कंपनी के और कर्मचारी शामिल हो सकते हैं।

कंपनी के कई कर्मचारी पुलिस के रडार पर

पुलिस भर्ती परीक्षा परीक्षा में तकनीकी सहायक कंपनी टीसीएस के कई कर्मचारी पुलिस की रडार पर हैं। जेल भेजे गए कर्मचारी से पूछताछ में इनके बारे में अहम जानकारी मिली है।

टीसीएस ने बायो मैट्रिक परीक्षण के लिए कई सिक्योरिटी फीचर रखे हैं। हर दिन यूजर को लॉगिन आइडी खोलने को नया पासवर्ड देती थी। पहले इसका समय 24 घंटे रहता था। एसपी सिटी रोहन बोत्रे ने बताया कि बनारस में फर्जी अभ्यर्थी को होटल में ले जाकर सत्यापन करने का मामला खुला था। इसके बाद हर दिन सुबह दस बजे पासवर्ड दिया जाता था। ये केवल शाम पांच बजे तक ही प्रभावी रहता था। इसके बाद फर्जी अभ्यर्थियों के सत्यापन पर कुछ अंकुश लगा था। तरुण और रूपेंद्र से पूछताछ में कई अहम जानकारी मिली हैं। टीसीएस के कुछ अन्य कर्मचारी भी शक के दायरे में हैं। इनसे भी जल्द पूछताछ की जाएगी। गिरफ्तार किए गए आरोपितों ने अभी तक दो फर्जी अभ्यर्थियों के बायो मैट्रिक मिलान करने की बात स्वीकार की है। आशंका है कि उन्होंने कई अन्य अभ्यर्थियों का भी सत्यापन किया होगा। इसकी भी जानकारी की जा रही है। जिन अभ्यर्थियों ने अपनी जगह सॉल्वरों का सत्यापन कराया है, उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा।

एक पांच दिन पहले और दूसरा नौ माह पहले निकाला

तरुण गौतम टीसीएस में 400 रुपये प्रतिदिन मानदेय पर नौकरी करता था। पांच दिन पहले ही कंपनी ने मामला खुलने पर उसे निकाल दिया। वहीं रूपेंद्र मार्च में नौकरी से निकाल दिया गया था। दोनों को पूरी जानकारी थी, इसलिए मिलकर यह फर्जीवाड़ा कर रहे थे।  

Posted By: Prateek Gupta

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