आगरा, जागरण संवाददाता। हिंदी पंचांग के तीसरे पवित्र माह ज्येष्ठ मास का कृष्ण पक्ष चल रहा है। हर माह आने वाली एकादशियों में इस सप्ताह ज्येष्ठ मास की पहली एकादशी 26 मई, गुरुवार को है और इस माह का पहला प्रदोष व्रत 27 मई, शुक्रवार को है। ज्योतिषाचार्य डॉ शाेनू मेहरोत्रा के अनुसार ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी को अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। वहीं हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है। त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। प्रदोष व्रत में प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सप्ताह के सातों दिन के प्रदोष व्रत का अपना विशेष महत्व होता है।

अपरा एकादशी का महत्व

ज्येष्ठ मास की एकादशी को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इससे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। अपरा एकादशी तिथि का प्रारंभ 25 मई बुधवार को सुबह 10:32 से होगा और समापन 26 मई गुरुवार सुबह 10:54 पर होगा। इस एकादशी का व्रत 26 मई गुरुवार को रखा जाएगा। वहीं पारण का समय 27 मई दिन शुक्रवार प्रातः काल 5:30 से 8:05 तक रहेगा।

अचला एकादशी व्रत की पूजा विधि

अचला एकादशी का व्रत एक दिन पहले ही शुरू हो जाता है। अर्थात दशमी के दिन ही प्रारंभ हो जाता है। अचला एकादशी के दिन व्रत रखने वाले को सुबह सुबह स्नान करके पीले वस्त्र पहनकर, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को पीले आसन पर बिठाकर पूजा करनी चाहिए। फूल, अक्षत चढ़ाकर, धूप, दीप, अगरबत्ती दिखाकर सच्चे मन से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए और अचला एकादशी व्रत कथा सुननी चाहिए। भगवान विष्णु को रोली व हल्दी का तिलक लगाएं, फूल और नैवेद्य चढ़ाएं।

करें इन नियमों का पालन

सुबह-सुबह स्नान कर पीला वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु की सच्चे मन से प्रार्थना करें। दिनभर फलाहारी व्रत रखें। शाम को भगवान विष्णु की आरती करें। पूजा के उपरांत यथाशक्ति दान पुण्य करें। अचला एकादशी में रात्रि को जागरण करें। अचला एकादशी व्रत का पारण अगले दिन विधि विधान से संपूर्ण करें।

प्रदोष व्रत

27 मई 2022, शुक्रवार। शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। ज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ - सुबह 11:47 बजे, 27 मई को आरंभ होगी और कृष्ण त्रयोदशी समाप्त दोपहर 01:09 बजे 28 मई को समाप्त होगी। प्रदोष काल- शाम 07:12 से रात 09:14 बजे तक रहेगा।

प्रदोष व्रत पूजन विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। स्नान करने के बाद साफ- स्वच्छ वस्त्र पहन लें। घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। अगर संभव है तो व्रत करें। भगवान भोलेनाथ का गंगा जल से अभिषेक करें। भगवान भोलेनाथ को पुष्प अर्पित करें। इस दिन भोलेनाथ के साथ ही माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा भी करें। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। भगवान शिव को भोग लगाएं। इस बात का ध्यान रखें भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान शिव की आरती करें। इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें।

ज्योतिषाचार्य डॉ शाेनू मेहरोत्रा 

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Edited By: Tanu Gupta