आगरा, जागरण संवाददाता। अगर, आपके मोबाइल पर किसी अंजान नंबर से कोई लिंक आ रहा है तो उसे क्लिक करने से पहले ठीक से पढ़ लें। हो सकता है वह साइबर शातिरों ने भेजा हो। उसे क्लिक करते ही वे मोबाइल हैक कर लेंगे। इसके बाद आपके पूरे बैंकिंग सिस्टम की चाबी अपने हाथ में लेकर आपसे ठगी करेंगे। साथ ही दूसरों से ठगी को भी आपका इस्तेमाल कर सकते हैं। साइबर सेल के पास इसी तरह का मामला आया है। अब साइबर शातिरों के बारे में जानकारी कर रही है।

हरीपर्वत क्षेत्र की एक छात्रा ने पिछले दिनों ऑनलाइन शॉपिंग की थी। सामान पसंद न आने पर उसने वापस कर दिया। रिफंड के लिए उसने सर्च इंजन गूगल से कंपनी का कस्टमर केयर नंबर लिया। यहीं से वह साइबर शातिरों के जाल में फंस गई। साइबर शातिरों ने कंपनी के नाम से मिलते जुलते नाम से अपना नंबर दे रखा था। इस पर कॉल करने पर छात्रा को बताया गया कि वे उसके मोबाइल पर एक लिंक भेज रहे हैं। इसको ओपन करने पर रिफंड हो जाएगा। छात्रा पर उसी समय एक लिंक एसएमएस से आया। उसको ओपन किया, लेकिन रिफंड नहीं हुआ। थोड़ी देर में छात्रा के ई वॉलेट से सात हजार रुपये पार हो गए। छात्रा मामले को समझती तब तक शातिरों ने उसके ई वॉलेट को भी ठगी के लिए इस्तेमाल कर लिया। मुंबई और दिल्ली के तीन लोगों के ई वॉलेट से भी इसी तरह रकम निकालकर शातिरों ने छात्रा के ई वॉलेट में डाली। इसके बाद उसमें से निकाल ली। उसके पास ठगी का शिकार हुए लोगों की कॉल आने लगी। वे कहने लगे कि उनके ई वॉलेट से छात्रा के ई वॉलेट में रकम ट्रांसफर हुई है। मुंबई से पुलिस ने भी कॉल किया तो छात्रा और उसके परिवार के लोग डर गए। उन्होंने साइबर सेल में मामले की शिकायत की। साइबर सेल ने छात्रा की सिम बदलवाईं। मोबाइल फार्मेट कराया। तब जाकर ठगी रुकी। मामले की जांच कर रही है।

ऐसे करते हैंं ठगी

शातिरों ने गूगल पर ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स से मिलते जुलते नामों से अपने नंबर डाल रखे हैं। सर्च करने पर ये सामने होते हैं। कॉल करने पर ये मोबाइल पर लिंक भेजने का झांसा देते हैं। इसको खोलते ही मोबाइल में स्पाईवेयर इंस्टॉल हो जाता है। इसके बाद यह हिडन फाइल में चला जाता है और किसी को दिखाई नहीं देता। शातिर मोबाइल को हैक कर लेते हैं। इसके बाद आसानी से इसका इस्तेमाल वे बैंकिंग में कर लेते हैं।

बरतें सावधानी

ऑनलाइन कस्टमर केयर नंबर सर्च करते समय सावधानी बरतें। बेहतर होगा कि कंपनी की वेब साइट खोलकर उस नंबर पर कॉल करें। कॉल करने पर कस्टमर केयर से मिलने वाली जानकारी भी विचार करने के बाद ही अमल करें।

शिकार बनने पर ये करें

मोबाइल को फार्मेट करके उसी नंबर की दूसरी सिम ले लें। इससे शातिर आगे ठगी या उसके लिए आपका इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

 

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