आगरा, जागरण संवाददाता। यमुना में जल नहीं सीवर बह रहा है। यमुना की गंदगी में पनपे कीड़े गोल्डीकाइरोनोमस ने ताज की सतह पर एक बार फिर दाग लगा दिए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की रिपोर्ट आए साढ़े तीन वर्ष बीत गए। लेकिन जिम्मेदार विभागों की तंद्रा नहीं टूटी। इनकी निष्क्रियता की सजा ताजमहल को मिल रही है।

ताजमहल की सतह पर सितंबर, 2015 में प्रदूषित यमुना में पनपे कीड़े गोल्डीकाइरोनोमस द्वारा छोड़ी गई गंदगी के दाग नजर आए थे। ताज की सतह पर हरे और गहरे भूरे रंग के दाग अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बने थे। इसके बाद एएसआइ की रसायन शाखा ने ताजमहल की सतह पर गंदगी छोडऩे वाले कीड़े पर अध्ययन किया था। जून, 2016 में रसायन शाखा ने कीड़े की स्थिति पर रिपोर्ट देते हुए उसके लिए यमुना की गंदगी को जिम्मेदार बताया था। एएसआइ ने यमुना की स्थिति में सुधार की तत्काल आवश्यकता बताई थी। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला उठने के बावजूद आज तक यमुना की दशा में सुधार को आवश्यक कदम नहीं उठाए जा सके हैं। यमुना में नालों का गिरना बदस्तूर जारी है और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट सफेद हाथी बने हुए हैं। इसके चलते एक बार फिर गोल्डीकाइरोनोमस ताज की सतह पर दाग छोड़ रहा है।

एएसआइ ने यह दिए थे सुझाव

-यमुना में जल स्तर बढ़ाया जाए, जिससे कि ताज के पाश्र्व में पानी स्थिर नहीं हो।

-यमुना में डीसिल्टिंग बहुत आवश्यक है। यमुना में जल प्रदूषण बढ़ाने वाले स्रोतों पर रोक लगाई जाए।

-समस्या के समाधान को विश्लेषण व मूल्यांकन के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान प्रयोगशालाओं और संस्थानों में समन्वय के साथ एक विस्तृत कार्य योजना बनाई जाए।

यमुना में बह रहा मथुरा और दिल्‍ली का सीवर

यमुना में 61 नाले सीधे गिर रहे हैं। एसटीपी स्वयं नहीं चला सके तो उनका टेंडर कर दिया। यमुना जल में बीओडी कम होने से आए दिन मछलियां मर जाती हैं। ताज के पीछे दुर्गंध की वजह से खड़ा होना भी मुश्किल है। यमुना में पानी के नाम पर दिल्ली और मथुरा का सीवर बह रहा है। यमुना को पुनर्जीवित करने की कोशिश ही नहीं की गई।

-डॉ. शरद गुप्ता, पर्यावरणविद 

Posted By: Tanu Gupta

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