खेत बने तालाब...कूलर की टंकियों से जुगाड़; धौलपुर में नाव बनाकर बालियां बचाने उतरे किसान
धौलपुर में भारी बारिश के कारण हजारों बीघा बाजरे की फसल पानी में डूब गई है, जिससे खेत तालाब बन ...और पढ़ें
HighLights
धौलपुर में भारी बारिश से हजारों बीघा बाजरे की फसल डूबी।
पानी में उतरकर महिलाएं-पुरुष बाजरे की बालियां तोड़ रहे हैं।
डाॅ. संदीप शर्मा, धौलपुर। भादौ की बारिश किसानों की पककर तैयार खड़ी फसल के लिए आफत बन गई। जिले के गांवों में खेत तालाब बन चुके हैं। सैंपऊ इलाके में हजारों बीघा में बाजरे की फसल पानी में डूबी है। कई खेतों में तीन से छह फीट तक पानी भरने से बाजरे के पौधे दिखाई तक नहीं दे रहे।
ऐसे में किसान पानी के बीच उतरकर फसल बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। फसलें डूबती देखकर अब किसान बची कुछी फसल को बचाने खेतों में नाव (कूलर की टंकियां) चलाकर फसलों को बचाने के लिए जतन शुरू कर दिए किए हैं। ऐसा नजारा पूरे खेतों में इस वक्त दिखाई दे रहा है।
सैंपऊ के परऊआ गांव में किसानों ने कूलर टंकी खरीदकर और पुराने घरों में टब का उपयोग कर बाजरे की बालियां तोड़ना शुरू किया है। किसान राजपाल कुशवाह का कहना है कि गत दिवस की बारिश से खेतों में चार से छह फीट पानी है, जो महीनों तक नहीं सूखने वाला।
इसलिए ये जुगाड़ बनाकर बाजरे को बचाने किसान परिवार के महिलाएं, पुरुष, युवक युवतियां दिन रात लग गए हैं। कई किसानों की ऐसी फसलें पानी में डूबी हुई हैं, जहा बाजरे की बालियां ही नहीं निकली हैं।

खेतों में पानी भरा होने के चलते पैर में प्लास्टिक का बोरा बांधकर चलता किसान
महिलाओं पैरों में कपड़े-बोरे बांधकर उतरी खेतों में
तीन-चार फीट तक पानी भरने से खेतों में जोक और कीड़ों के काटने के डर से पैरों में मोजे, कपड़ा और बोरे बांधकर लोग पानी में उतर रहे हैं। घंटों पानी में खड़े रहकर पकी बालियां तोड़कर घर तक पहुंचाई जा रही हैं।
किसानों का कहना है कि पूरी फसल बचाना मुश्किल है, लेकिन जितनी बालियां सुरक्षित निकल जाएं, उतना नुकसान कम होगा। 80 फीसदी खेतों में पानी है। महिलाएं तो पानी में उतरने से पहले पाजामा पहन कर बालियां तोड़ने में जुटी हुई हैं।
