आगरा, जेएनएन। राधारानी ब्रजयात्रा में शामिल श्रद्धालु मंगलवार को हरियाणा से मथुरा आते समय यमुना पार कर रहे थे। रस्सी के सहारे यमुना पार करते समय कुछ श्रद्धालुओं ने स्नान किया तो कुछ ने आचमन किया। कुछ देर बाद उल्टी-दस्त से करीब 250 श्रद्धालुओं की हालत बिगड़ गई। गंभीर हालत में 35 श्रद्धालुओं को अस्पतालों में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान पश्चिम बंगाल के एक वृद्ध की मौत हो गई। आशंका है कि यमुना का प्रदूषित जल ग्रहण करने से श्रद्धालुओं की हालत बिगड़ गई।

राधारानी ब्रजयात्र ने सोमवार को हरियाणा के महरौली में पड़ाव डाला था। मंगलवार सुबह यात्रा महरौली से यमुना पार कर अलीगढ़ के जैदपुरा क्षेत्र में आ रही थी। आवागमन के लिए यमुना पर पीपे का पुल बनता है, लेकिन इस बार नहीं बन सका। ऐसे में रस्सा डालकर हजारों श्रद्धालु यमुना पार कर रहे थे। यमुना पार करते समय कुछ श्रद्धालुओं के मुंह में पानी चला गया, तो कुछ ने आचमन किया। कुछ ने पार करने के दौरान ही स्नान किया। कुछ देर बाद ही श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई। करीब 250 श्रद्धालुओं को उल्टी-दस्त शुरू हो गईं। आनन-फानन में यात्रा में शामिल स्वास्थ्य टीम ने श्रद्धालुओं का उपचार किया। लेकिन 35 की हालत गंभीर होने पर उन्हें नौहझील सीएचसी, वृंदावन के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ श्रद्धालुओं को कोसी के ब्रज नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है। उपचार के दौरान पश्चिम बंगाल के 85 वर्षीय श्रद्धालु रामकृष्ण की मौत हो गई। सीएमओ डॉ. शेर सिंह ने बताया कि इलाज करने वाले चिकित्सकों ने यमुना का प्रदूषित जल पेट में जाने से हालत बिगड़ने की आशंका जताई है।

यह हुए बीमार

बीमार होने वालों में पश्चिम बंगाल के मिदिनापुर निवासी कनौत दास (60), चौबीस परगना निवासी अनिमा मंडल (70), मलखान गिरि की सावित्री देवी (40), मेदिनीपुर की गंगादासी (55), ओडीशा के ठाकुरवाला दास (55) खड़गपुर की ज्योत्सना (20) को वृंदावन में भर्ती कराया गया। जबकि नौहझील सीएचसी में अमिका (70), आनंदी ठाकुरदास (70), अल्पना दासी (60) आदि शामिल हैं।

कृष्णनगरी में यमुना सर्वाधिक प्रदूषित

जीवनदायिनी यमुना के जल में घुला प्रदूषण एक तीर्थयात्री का काल बन गया, लेकिन खुद यमुना रोज तिल-तिल कर मर रही है। हालत यह है कि उत्तर प्रदेश में आगरा और मथुरा में यमुना जल सर्वाधिक प्रदूषित है और इसका कारण इन शहरों के नाले हैं। हाल ही में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जो आंकड़े आए हैं, वह पुष्ट करते हैं कि स्थिति सुधरने के बजाय बिगड़ती ही जा रही है।

यमुना जहां-जहां आबादी से गुजरती है, उसके प्रदूषण में इजाफा होता जाता है। आगरा में सबसे भयावह स्थिति ताज के डाउन स्ट्रीम में है। यूपीपीसीबी द्वारा जनवरी से अगस्त तक के आंकड़ों पर जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में कैलाश घाट पर टोटल कॉलिफॉर्म की मात्र 37 हजार एमपीएन थी। वाटर वर्क्‍स पर बढ़कर टोटल कॉलिफार्म 48 हजार एमपीएन और ताज के डाउन स्ट्रीम पर 1.10 लाख एमपीएन तक पहुंच गया।

अगस्त में यूपीपीसीबी द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में लिए गए यमुना जल के सैंपलों में यह सर्वाधिक प्रदूषित है। इससे कम टोटल कॉलिफार्म मथुरा के शाहपुर में 98 हजार एमपीएन दर्ज किया गया। अगर जनवरी से अगस्त तक के औसत की बात करें तो यह ताज पर 115625 एमपीएन और मथुरा के शाहपुर गांव में 111750 एमपीएन रहा।

टोटल कॉलिफार्म

मानव व जीवों का अपशिष्ट। इसकी गणना मोस्ट प्रोबेबल नंबर (एमपीएन) प्रति 100 एमएल में की जाती है। नहाने के पानी में यह 500 एमपीएन से अधिक नहीं होनी चाहिए। जिस पानी में यह 5000 एमपीएन से अधिक है, उसका ट्रीटमेंट नहीं किया जा सकता।

स्‍वास्‍थ टीम ने संभाला मोर्चा

ब्रजयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं की हालत बिगड़ने के बाद यात्रा में शामिल स्वास्थ्य टीम ने मोर्चा संभाला। आनन-फानन में दवा देकर बाकी यात्रियों को ठीक किया गया। लेकिन 35 की हालत गंभीर हो गई। ऐसे में शामिल लोगों में खलबली मच गई। कुछ श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्होंने यमुना पार करने के बाद ब्रेड और दूध पिया था। ब्रजयात्रा की देखरेख कर रहे मान मंदिर बरसाना के सचिव सुनील सिंह ने बताया कि यमुना का जल बेहद प्रदूषित था। यात्रा में शामिल हजारों श्रद्धालुओं ने दूध पिया और ब्रेड खाई, लेकिन उन्हीं की तबीयत खराब हुई, जिन्होंने किसी तरह यमुना का प्रदूषित जल ग्रहण किया।

12 दिन में जैदपुरा पहुंची ब्रजयात्रा

हर साल 84 कोसी परिक्रमा को निकलने वाली राधारानी ब्रजयात्रा 11 अक्टूबर को बरसाना के मान मंदिर से शुरू हुई थी। 38 दिवसीय ब्रजयात्रा में नेपाल और बांग्लादेश के साथ ही विभिन्न प्रांतों के करीब दस हजार श्रद्धालु शामिल हैं। अलग-अलग पड़ाव से होती हुई यात्रा मंगलवार को अलीगढ़ के टप्पल क्षेत्र में जैदपुरा पहुंची।

यमुना में गिरे कई श्रद्धालु

ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा में शामिल श्रद्धालुओं का जोश देखते बन रहा था, जिसके चलते किसी तरह की दिक्कत उनके लिए कोई मायने नहीं रख रही। यमुना पार करना भी आसान न था। यमुना में घुटनों से अधिक पानी था। इस दौरान कई यात्री पानी में गिरे भी, जिन्हें साथियों ने उठाया।

श्रद्धालु रहे निराश

यमुना के प्रदूषित पानी का आचमन करने से एक श्रद्धालु की मौत और करीब 250 के बीमार होने से हर कोई चिंतित था। कुछ श्रद्धालु निराश भी नजर आए।

इन प्रदेशों के हैं श्रद्धालु

यात्रा के व्यवस्थापक राधा कांत शात्री ने बताया कि यात्रा में 12 हजार श्रद्धालु शामिल हुए हैं। ये यात्री मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, बिहार के अलावा ब्रज क्षेत्र के हैं। यात्र का समापन 17 नवंबर को होगा।

इनका क्‍या है कहना

वही लोग बीमार पड़े हैं, जिन्होंने यमुना का प्रदूषित जल ग्रहण कर लिया है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यमुना का प्रदूषित पानी पीने से ही उनकी हालत बिगड़ी है।

डॉ. दिलीप कुमार, संयुक्त चिकित्सालय वृंदावन

ब्रजयात्रा हरियाणा के महरौली से अलीगढ़ के जैदपुरा जा रही थी। घटना उसी क्षेत्र की है। करीब 30 लोगों के बीमार होने की सूचना है। इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ श्रद्धालु ठीक होने के बाद यात्र में शामिल हो गए हैं।

सर्वज्ञराम मिश्र, डीएम

 

Posted By: Tanu Gupta

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