विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चांदी खाती रहे भाव...दीपावली पर बजट में ही रहेंगे लक्ष्मी-गणेश; आगरा में बन रहीं होलो मूर्तियां

By Nirlosh Kumar Edited By: Prateek Gupta
Published: Wed, 14 Oct 2026 08:49 AM (IST)

आगरा में त्योहारी सीजन के साथ चांदी के कारोबार में रौनक लौट आई है, स्थिर कीमतों और दीपावली की खरीदारी ...और पढ़ें

आगरा में इस तरह की चांदी की होलो मूर्तियां बनाई जा रही हैं, जो वजन में बहुत कम हैं।

आगरा में इस तरह की चांदी की होलो मूर्तियां बनाई जा रही हैं, जो वजन में बहुत कम हैं।

जागरण संवाददाता, आागरा। नवरात्र के साथ त्योहारी सीजन शुरू होते ही चांदी के कारोबार में एक बार फिर खनक लाैट आई है। पिछले वर्ष दीपावली के बाद मूल्य में रिकार्ड वृद्धि से चांदी के आभूषणों का कारोबार ठंडा पड़ गया था। चांदी की कीमतें स्थिर होने और त्योहारी सीजन व दीपावली पर होने वाली खरीदारी ने कारोबारियों को आस जगाई है।

वजन में हल्के वजनी चांदी के आभूषणों, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों, सिक्कों और उपहार में दिए जाने वाले उत्पाद की मांग अधिक है। कारोबारियों द्वारा मूर्तियों के डिजाइन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आगरा देश के प्रमुख चांदी कारोबार केंद्रों में शामिल है। यहां एक दिन में करीब पांच टन चांदी का कारोबार होता है। यहां तैयार होने वाली पायल, चेन, बिछुओं, ब्रेसलेट की मांग देशभर में रहती है।

धनतेरस पर चांदी के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, पूजा की थालियां और उपहार में दिए जाने वाले चांदी के उत्पाद ग्राहकों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं। दीपावली पर पिछले वर्ष चांदी के 1.8 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंचने के बावजूद के सिक्कों और मूर्तियाें की अच्छी मांग दिखी थी। जनवरी में चांदी रिकार्ड चार लाख रुपये से अधिक कीमत तक पहुंच गई थी। इससे चांदी का कारोबार ठंडा हो गया था।

इन दिनों चांदी 2.25 लाख रुपये से 2.30 लाख रुपये प्रति किलो के बीच स्थिर है। करवाचौथ, धनतेरस और दीपावली और सहालग के लिए किनारी बाजार, नमक की मंडी स्थित कारखानों में आभूषण बनाने का काम शुरू हो गया है। चांदी का मूल्य अधिक होने से हल्के वजन के आभूषणों की मांग बढ़ी है। पहले जो पायल 30 से 40 ग्राम में बनती थी, अब वह 12 से 15 ग्राम में बनाई जा रही है।

चांदी की चेन 1.5 से दो ग्राम और चार से पांच ग्राम वजन में भी बनाई जाने लगी हैं। पहले लक्ष्मी-गणेश की जो मूर्तियां 30 से 40 ग्राम वजन में बनाई जाती थीं, अब वह 10 ग्राम वजन में बनाई जाने लगी हैं। होलोग्राम मूर्तियों की मांग देशभर में रहती है, यह मूर्तियां अंदर से खोखली होती हैं। चांदी की कीमत बढ़ने से ठोस मूर्तियों की मांग कम हुई है। 10 ग्राम वजन का लक्ष्मी-गणेश का चांदी सिक्का अब कम वजन में भी बन रहा है।

पांच ग्राम वजन के सिक्के की मांग है। दीनदयाल ज्वेलर्स के दीपांशु अग्रवाल बताते हैं कि त्योहारी सीजन में चांदी के जेवर, मूर्तियों, सिक्कों और उपहार में दिए जाने वाले सामान के काम में पिछले दो-तीन माह की अपेक्षा वृद्धि देखने को मिल रही है। चांदी के दाम भी कुछ समय से स्थिर बने हुए हैं, हालांकि ग्राहक कम वजन वाली मूर्तियां पसंद कर रहे हैं।

चांदी कारोबार: एक नजर

  • आगरा में प्रतिदिन करीब पांच टन चांदी का कारोबार होता है।
  • 40 हजार से अधिक कारीगर चांदी कारोबार से जुड़े हुए हैं।

 

त्योहारी सीजन में आर्डर मिलना शुरू होने से लंबे समय से ठंडे पड़े बाजार में एक बार फिर रौनक लौटने लगी है। पिछली दीपावली की अपेक्षा करीब 60 प्रतिशत आर्डर मिले हैं। चांदी का मूल्य अधिक होने से कारोबार पिछले वर्ष के स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है।ब्रजमोहन रैपुरिया, अध्यक्ष आगरा सराफा मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन

चांदी की कीमतें बढ़ने से हमने लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों और सिक्कों का वजन कम किया है। पहले साधारण मूर्तियां अधिक बनाई जाती थीं, लेकि अब चांदी की कीमत बढ़ने से ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए मूर्तियों के डिजाइन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विनय दौनेरिया, मूर्ति कारोबारी

त्योहारी सीजन में बाजार में उत्साह देखने को मिल रहा है। लंबे समय से बाजार ठंडा पड़ा था, लेकिन अब काम शुरू हो गया है। चांदी के भाव स्थिर हुए हैं, जिससे ग्राहकों का विश्वास बढ़ा है। उम्मीद है कि दीपाावली तक स्थिति में और सुधार होगा।
नीतेश अग्रवाल, अध्यक्ष आगरा सराफा एसोसिएशन