आगरा, जागरण संवाददाता। डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में एमबीबीएस की उत्तर पुस्तिकाओं में हुए फर्जीवाड़े की जांच होगी। कुलपति प्रो. आशू रानी ने फर्जीवाड़े से संबंधित जानकारी मांगी है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।

असली उत्तर पुस्तिकाओं में शिक्षकों के फर्जी हस्ताक्षर

सितंबर 2021 की एमबीबीएस द्वितीय प्रोफेशनल की परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाएं इस साल जनवरी में पुन: मूल्यांकन के लिए आंबेडकर विश्वविद्यालय पहुंची थीं। कुछ उत्तर पुस्तिकाएं संदिग्ध मिलीं। शिक्षकों ने इसकी शिकायत की। तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक अजय कृष्ण यादव ने समिति गठित कर बैठक की थी। बैठक में असली उत्तर पुस्तिकाओं में शिक्षकों के फर्जी हस्ताक्षर की जानकारी सामने आई। इस पर मेडिकल कालेज के शिक्षकों ने कापियों के मूल्यांकन से इन्कार कर दिया।

फर्जीवाड़े की रिपोर्ट कुलपति ने मांगी

अजय कृष्ण यादव ने इसकी जानकारी कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक को देने की बजाय कहीं और से उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन करवाकर परिणाम घोषित कर दिया था। दैनिक जागरण ने पूरे मामले का पर्दाफाश किया था।

कुलपति प्रो. आशू रानी ने खबरों का संज्ञान लिया है। उन्होंने एमबीबीएस की परीक्षाओं में हुए फर्जीवाड़े की रिपोर्ट मांगी है। इसमें उत्तर पुस्तिकाएं कौन से सत्र की थीं, किस कालेज की थीं, शिक्षकों ने उनमें क्या संदिग्धता देखी थी, लिखित में क्या शिकायत की थी, इन सभी बिंदुओं को जांच में शामिल किया गया है।

दबाते नहीं तो नहीं लगता विश्वविद्यालय पर एक और धब्बा

डॉक्टर भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की एमबीबीएस की उत्तर पुस्तिकाओं में मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों के फर्जी हस्ताक्षर, लेखन शैली एक सी, उत्तर पुस्तिकाओं के कोने में अंग्रेजी में एफएच और केडी लिखा हुआ, होना यह सारी जानकारी दैनिक जागरण की पड़ताल में सामने आई थी। शुक्रवार और शनिवार को प्रकाशित खबरों में दैनिक जागरण में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष प्रोफेशनल की सप्लीमेंट्री की उत्तर पुस्तिकाओं में हुए फर्जीवाड़े की जानकारी अपने पाठकों को दी थी।

कौमा और फूलस्टॉप तक का अंतर नहीं था

इस साल जनवरी में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष प्रोफेशनल की उत्तर पुस्तिकाएं एसएन मेडिकल कॉलेज के शिक्षकों के पास पुनर्मूल्यांकन के लिए पहुंची थी। कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में शिक्षकों को गड़बड़ी लगी थी। सभी प्रश्नों के उत्तर प्रश्न सही थे जबकि अंक उन्हें चार दिए गए थे। इसे देखकर शिक्षकों का माथा ठनका। गौर किया तो पाया कि लेखन शैली भी कई उत्तर पुस्तिकाओं में एक सी है। कौमा और फूलस्टॉप तक का अंतर नहीं था। यहां तक कि डायग्राम की लेबलिंग भी एक सी थी। इसकी शिकायत मेडिकल कॉलेज के शिक्षकों ने अपने यहां की परीक्षा नियंत्रक डॉ रेनू अग्रवाल से की थी। डॉ अग्रवाल ने इसकी जानकारी प्राचार्य डॉ प्रशांत गुप्ता को दी। डॉ गुप्ता ने इसकी जानकारी आंबेडकर विश्वविद्यालय के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक अजय कृष्ण यादव को दी।

परीक्षा नियंत्रक ने किया था समिति का गठन

अजय कृष्ण यादव ने अपने स्तर से ही समिति का गठन किया और एक बैठक बुलाई। इस बैठक में मेडिकल कॉलेज के शिक्षकों के साथ ही परीक्षा नियंत्रक और प्राचार्य भी उपस्थित थे। इस बैठक में शिक्षकों की शिकायतों के आधार पर असली उत्तर पुस्तिकाओं को सामने रखा गया। जिनकी जांच के बाद शिक्षकों ने अधिकारियों के सामने यह तथ्य रखे कि उन उत्तर पुस्तिका में शिक्षकों के हस्ताक्षर भी फर्जी हैं। जिस तरह से वह अंग्रेजी में एफ़ या अंक चार बनाते हैं वह भी अलग तरह से बना हुआ था। इन शिकायतों के बाद मेडिकल कॉलेज के शिक्षकों ने मूल्यांकन करने से लिखित में मना कर दिया।

एक सप्ताह में हुआ था परीक्षा कार्यक्रम घोषित

तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक ने इसकी जानकारी कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक को देने की बजाय कहीं और से कॉपियों का मूल्यांकन करवा कर एक हफ्ते में ही परिणाम भी घोषित करवा दिया। इस संबंध में जब मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और परीक्षा नियंत्रक से बात की गई तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की। अजय कृष्ण यादव वर्तमान में लखनऊ के ख्वाजा मोइनुद्दीन भाषा विश्वविद्यालय में कुलसचिव है। उनसे कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। जबकि कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक का कहना था कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं दी गई थी, केवल इतना बताया गया था कि मेडिकल कॉलेज के शिक्षक परीक्षा नियंत्रक से मिलना चाहते हैं।

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Edited By: Abhishek Saxena

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