यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 13, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Vasant Panchami: वसंत पंचमी पर 106 साल का हो जाएगा आगरा का दयालबाग, पढ़ें क्या है इतिहास
Vasant Panchamiराधास्वामी मत के पांचवें आचार्य हुजूर महाराज ने 1915 में रखी थी दयालबाग की नींव। वसंत पंचमी के दिन ...और पढ़ें

आगरा, गौरव भारद्वाज। वसंत ऋतु...हर मन को आकर्षित करने वाली ऋतु। सभी ऋतुओं के राजा वसंत पंचमी पर्व से जुड़ा प्राकृतिक लावण्यता के साथ अध्यात्म की गहराई से भी जुड़ा है। ा ज्ञानदायनी मां सरस्वती की जयंती है तो राधास्वामी मत के लिए इसका विशेष महत्व रखती है। इसी दिन राधास्वामी मत के सत्संग की शुरुआत हुई और इसी दिन दयालबाग की नींव रखी गई थी।
1861 में वसंत पंचमी के दिन हुज़ूर स्वामीजी महाराज ने सबसे पहले पन्नी गली में सर्वसाधारण के लिए सत्संग प्रारम्भ किया था। इसी दिन राधास्वामी मत उद्घाटित हुआ। 16 फरवरी 2021 को वसंत पर सत्संग को 160 साल हो जाएंगे। वसंत के ही दिन 20 जनवरी 1915 को राधास्वामी मत के पांचवें आचार्य हुजूर साहब जी महाराज ने 'मुबारक कुएं' के निकट शहतूत के वृक्ष का रोपण कर कालोनी की नींव रखी थी तथा इसका नाम 'दयालबाग' रखा था। वसंत पर दयालबाग कालोनी को 106 साल पूरे हो जाएंगे। वहीं, राधास्वामी मत निरन्तर प्रगति करते हुए 202 वर्ष पूरे कर चुका है।

अलग है मुबारक कुएं का महत्व
दयालबाग में 'मुबारक कुएं' का अपना महत्व व इतिहास है। स्वामीजी महाराज वहां सुबह घूमने आया करते थे। दातून करने के बाद वह इसी कुएं का जल प्रयोग करते थे। राधास्वामी मत के द्वितीय आचार्य (संत सतगुरु) कुएं से पानी खींचकर हुजूर स्वामीजी महाराज की सेवा में पेश करते थे। उस समय कुएं के आस-पास ऊंचे-ऊंचे टीले और कंटीली झाड़िया थीं। इस परिसर में 'मुबारक कुआं' और 'शहतूत का पेड़' आज भी संरक्षित है। मुबारक कुएं के पास ऊंचे-ऊंचे टीले और कंटीली झांडि़यां थीं। मगर, वहां पर आज 1200 एकड़ जमीन पर हरे-भरे खेत लहलहा रहे हैं। इन खेतों में हर प्रकार की फसल, फल, सब्जी व कई प्रकार की आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां उगाई जाती हैं। खेती के अलावा दयालबाग की गोशाला में करीब 800 गाय व भैंस हैं।
पीले रंग से रंगा दयालबाग
वसंतोत्सव के लिए दयालबाग को पीले रंग से सजाया जा रहा है। हर कूचा, हर गली बस पीत रंग से सज रही है। इस सजावट के लिए तैयारियां एक- दो दिन पहले नहीं, बल्कि तीन से चार महीने पहले शुरू हो जाती हैं। वसंत पर घरों के बाहर क्यारी और गमलों में पीले फूल लहलहाएं, इसलिए तीन महीने पहले नए पौधे रोपे जाते हैं। इस वक्त यदि दयालबाग की राधानगर कालोनी में प्रवेश किया जाए तो पीत रंग से सजा सुनहरा आंगन आपका स्वागत करेगा। हर ओर पीले-पीले फूल। ऐसा कोई घर नहीं, जिसके बाहर फूल न खिल रहे हों।
ये होंगे कार्यक्रम
दयालबाग का वसंतोत्सव 14 से 16 फरवरी तक मनाया जाएगा। 14 फरवरी को सुबह साढे़ चार बजे खेतों पर बेबी शो होगा। 15 फरवरी को दोपहर दो बजे से जिमनास्टिक प्रतियोगिता होगी। 16 फरवरी को दोपहर दो बजे खेलकूद प्रतियोगिताएं होंगी। रात को सजा सज्जा होगी। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते शारीरिक दूरी का पालन कराने के लिए सभी कार्यक्रम खेतों में होंगे। इस बार बाहर से कोई अनुयायी को वसंत कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई है।
